गोरकी पतरकी रे--मो. रफ़ी के भोजपुरी और बांगला गीत--जन्मदिन पर विशेष
आज चौबीस दिसंबर है ।
मो. रफ़ी साहब का जन्मदिन । इस दिन को रफ़ी के चाहने वाले बड़े चाव ये याद रखते हैं ।
दिन भर की हड़बड़ी और भागमभाग के बीच भी रफ़ी साहब की याद में मैंने एक गाना रेडियोवाणी पर सुनवाने की ठान रखी थी । और वो है एक भोजपुरी गीत । सन 1979 में आई फिल्म बलम परदेसिया का ये गीत मुझे इंटरनेट खंगालने के बाद आखि़रकार मिल ही गया । इसे चित्रगुप्त ने स्वरबद्ध किया है ।
रफी साहब की ख़ासियत ये थी कि वो किसी भी भाषा का गाना बड़ी सहजता से गा लेते थे । उन्होंने भोजपुरी भी गाय, बांगला भी और अंग्रेज़ी भी । यहां तक कि दक्षिण की भाषाओं में भी उनके कुछ गीत हैं । मो. रफ़ी के चाहने वाले उनकी याद में एक वेबसाईट चलाते हैं जिस पर टिप्पणियों की तादाद देखकर आपको हैरत होगी । यहां सामग्री भी कमाल की है । मुझे निजी रूप से रफ़ी साहब के गाये भजन और कुछ नाज़ुक रूमानी गाने बेहद पसंद हैं । कुछ गाने यहां पेश हैं । आज रफ़ी साहब को याद करना उनके शैदाईयों के लिए एक रवायत भी है और ज़रूरत भी । रफ़ी की आवाज़ हमारी जिंदगी की खुशनसीबी है ।
पहले सुनिए--फिल्म बलम परदेसिया का ये गीत--गोरकी पतरकी रे ।
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जल्दी जल्दी चल रे कहारा सुरूज डूबे रे नदिया
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ये रहे रफ़ी साहब के गाये कुछ बांगला गीत ।
आज मोधुरो बंसरी बाजे ।।
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कोने चालबाजेर मुखे
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काजी नजरूल इस्लाम की रचना रफ़ी साहब की आवाज़ बोल हैं --आधो आधो बोल लाजे.......
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उम्मीद है कि रफ़ी साहब के इन गीतों को सुनकर आपकी आज की शाम संवर जायेगी । मैं तो आज रफ़ी साहब की आवाज़ में डूबकर एक दूसरी ही दुनिया में पहुंच गया हूं ।
