संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।
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Monday, May 5, 2008

गीतकार आनंद बख्‍शी के गाए गीतों पर आधारित पॉडकास्‍ट

रेडियोवाणी के एक साल पूरे होने पर मैंने कहा था कि इस साल कोशिश ये रहेगी कि आपको कुछ पॉडकास्‍ट अपनी आवाज़ में भी सुनवाए जाएं । तो लीजिए इस कड़ी में आपको सुनवा रहा हूं आनंद बख्‍शी के गाए गीतों पर केंद्रित ये पॉडकास्‍ट ।                               

                                     anand

लेकिन इससे पहले कुछ और बातें करना चाहता हूं ।

रेडियोवाणी और रेडियोनामा दोनों पर हम पॉडकास्‍ट पर थोड़ा और ज़ोर देना चाहते हैं । रेडियोनामा पर जल्‍दी ही आप रेडियोसखी ममता सिंह की आवाज़ में मुंशी प्रेमचंद के उपन्‍यास निर्मला का वाचन सुनेंगे । आप सोचेंगे कि निर्मला ही क्‍यों । दरअसल कुछ बरस पहले विविध भारती के लिए रेडियोसखी ममता सिंह ने निर्मला का वाचन किया था जिसे देश-विदेश के श्रोताओं ने बहुत सराहा था । अफ़सोस ये है कि उस समय उसकी कोई कॉपी विविध भारती के संग्रहालय में सुरक्षित नहीं रखी जा सकी । इस तरह से एक शुरूआत भी होगी और एक डेटाबेस भी बनेगा । उम्‍मीद करूं कि हम ऐसी व्‍यवस्‍था कर पाएंगे कि इन तमाम कडियों को आप डाउनलोड भी कर पाएं । अगर आपके मन में कोई ऐसी आकार में छोटी कृति है और जिसे लेकर कॉपीराइट का कोई इशू नहीं बनता, तो सुझाएं । जल्‍दी ही रेडियोनामा और रेडियोवाणी पर मैं और रेडियोसखी ममता सिंह दोनों ही कुछ कृतियों का वाचन आरंभ करेंगे ।

अपनी राय देकर इस मुद्दे को आगे बढ़ाएं । ताकि जल्‍दी ही काम शुरू करें ।

तो चलिए फिलहाल आनंद बख्‍शी की गायकी पर केंद्रित ये पॉडकास्‍ट सुनें ।

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Saturday, July 14, 2007

लीजिये पेश है मदनमोहन पर केंद्रित मेरा पॉडकास्‍ट, उन गानों पर जो आप ही ने सुझाये थे ।


दोस्‍तो आपको याद होगा कि पच्‍चीस जून को मदनमोहन के जन्‍मदिन पर मैंने उनके गीतों पर आधारित एक पोस्‍ट लिखी थी और उसमें पूछा था कि मदनमोहन के स्‍वरबद्ध किये आपके पसंदीदा गीत कौन से हैं । अच्‍छा लगा कि बड़ी तादाद में आपने अपनी सूची प्र‍स्‍तुत की और उससे भी दिलचस्‍प बात थी उड़नतश्‍तरी का ये कहना कि आप इस पर अपना पॉडकास्‍ट प्रस्‍तुत कर दीजिये ।

मामला रोचक पर कठिन बन गया था । इसलिये मैंने अपने एक लेख में आपकी भेजी तमाम सूचियों को समेट कर ये कह दिया था कि जल्‍दी से जल्‍दी आपना पॉडकास्‍ट आप तक पहुंचाऊंगा । तभी मुझे याद आया कि चौदह जुलाई को मदनमोहन की पुण्‍यतिथि है, इसलिये मैंने पॉडकास्‍ट तैयार होने के बावजूद रोक लिया । ताकि सही मौक़े पर उसे आप तक पहुंचाया जाये ।

तो लीजिये पेश है आपके पसंद किये गीतों पर आधारित पॉडकास्‍ट जिसमें मैं मदनमोहन की स्‍मृति को नमन कर रहा हूं ।

ये रहा पहला पॉडकास्‍ट जिसमें लता जी और मदनमोहन की जोड़ी की चर्चा है ।
















ये रहा दूसरा पॉडकास्‍ट जिसमें मदनमोहन और रफी के साथ की चर्चा है, साथ ही कुछ अन्‍य कलाकारों के गानों की भी बातें हैं ।




















मुझे यक़ीन है कि पॉडकास्‍ट आपको अच्‍छा लगेगा । चलते चलते आपसे बस यही कहना है कि मदनमोहन को उनके जीवन में जो ‘नाम’ और शोहरत नहीं मिली, वो उनके जाने के बाद मिली । 1975 में वो इस संसार से चले गये थे । उस साल ‘मौसम’ और ‘दिल की राहें’ जैसी फिल्‍में आईं थीं । उनके जाने के बाद उनकी कुछ और फिल्‍में आईं । उनकी धुनें इस भागमदौड़ जिंदगी में हमें ट्रान्‍स में ले जाती हैं । हम उन्‍हें बहुत शिद्दत से याद करते हैं ।



इस श्रृंखला के पिछले लेख--


2.ये रहे संगीतकार मदनमोहन के आपके पसंदीदा गीत जिन्‍हें मैं अपने अगले पॉडकास्‍ट में सुनवाऊंगा

मनीष के कहने पर मैंने इन दोनों लेखों के लिंक दिये हैं । दूसरे लेख में मदनमोहन के गानों की विराट सूची है । ये सूची पहले लेख पर आई आपकी टिप्‍पणीयों से तैयार की गई है ।

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Saturday, July 7, 2007

लीजिये पेश है मदनमोहन पर केंद्रित मेरा पॉडकास्‍ट, उन गानों पर जो आप ही ने सुझाये थे ।


दोस्‍तो आपको याद होगा कि पच्‍चीस जून को मदनमोहन के जन्‍मदिन पर मैंने उनके गीतों पर आधारित एक पोस्‍ट लिखी थी और उसमें पूछा था कि मदनमोहन के स्‍वरबद्ध किये आपके पसंदीदा गीत कौन से हैं । अच्‍छा लगा कि बड़ी तादाद में आपने अपनी सूची प्र‍स्‍तुत की और उससे भी दिलचस्‍प बात थी उड़नतश्‍तरी का ये कहना कि आप इस पर अपना पॉडकास्‍ट प्रस्‍तुत कर दीजिये ।

मामला रोचक पर कठिन बन गया था । इसलिये मैंने अपने एक लेख में आपकी भेजी तमाम सूचियों को समेट कर ये कह दिया था कि जल्‍दी से जल्‍दी आपना पॉडकास्‍ट आप तक पहुंचाऊंगा । तभी मुझे याद आया कि चौदह जुलाई को मदनमोहन की पुण्‍यतिथि है, इसलिये मैंने पॉडकास्‍ट तैयार होने के बावजूद रोक लिया । ताकि सही मौक़े पर उसे आप तक पहुंचाया जाये ।

तो लीजिये पेश है आपके पसंद किये गीतों पर आधारित पॉडकास्‍ट जिसमें मैं मदनमोहन की स्‍मृति को नमन कर रहा हूं ।

ये रहा पहला पॉडकास्‍ट जिसमें लता जी और मदनमोहन की जोड़ी की चर्चा है ।
















ये रहा दूसरा पॉडकास्‍ट जिसमें मदनमोहन और रफी के साथ की चर्चा है, साथ ही कुछ अन्‍य कलाकारों के गानों की भी बातें हैं ।




















मुझे यक़ीन है कि पॉडकास्‍ट आपको अच्‍छा लगेगा । चलते चलते आपसे बस यही कहना है कि मदनमोहन को उनके जीवन में जो ‘नाम’ और शोहरत नहीं मिली, वो उनके जाने के बाद मिली । 1975 में वो इस संसार से चले गये थे । उस साल ‘मौसम’ और ‘दिल की राहें’ जैसी फिल्‍में आईं थीं । उनके जाने के बाद उनकी कुछ और फिल्‍में आईं । उनकी धुनें इस भागमदौड़ जिंदगी में हमें ट्रान्‍स में ले जाती हैं । हम उन्‍हें बहुत शिद्दत से याद करते हैं ।

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