संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।

Monday, June 25, 2007

फिर वही शाम वही ग़म---संगीतकार मदन मोहन के जन्‍मदिन पर बताईये उनके कौन से गाने आपको पसंद हैं और क्‍यूं





आज संगीतकार मदनमोहन का जन्‍मदिन है । आज अगर वो जीवित होते तो तिरासी साल के हो जाते । मदनमोहन एक अनमोल संगीत विरासत छोड़ गये हैं । उनके जीवन के बारे में बातें फिर कभी होंगी । पर आज मैंने ये सोचा है कि मदनमोहन के कुछ गीत आपको सुनवाऊं और दिखाऊं । और साथ में आपसे ये भी पूछूं कि आपको मदनमोहन के कौन कौन से गाने बहुत प्रिय हैं । और क्‍यों । आपकी टिप्‍पणियों को संयोजित करके एक नई पोस्‍ट में प्रस्‍तुत करने की मेरी योजना है । जो लोग अंग्रेज़ी में टिप्‍पणियां करते हैं वो नि:संकोच अपनी बात लिखें मैं उसे हिंदी में प्रस्‍तुत कर दूंगा । देखना ये है कि इन गानों के बहाने आप अपने जीवन की क्‍या क्‍या बातें याद करते हैं । इन सबके साथ मुझे अपनी बातें भी कहनी हैं । पर अगली पोस्‍ट में । फिलहाल सुनिए और देखिए मदनमोहन के दो अनमोल गाने । साथ में हैं कुछ अनमोल तस्‍वीरें ।

ये लता जी का गाया फिल्‍म अनपढ़ का गीत । आपको याद होगा नौशाद ने मदनमोहन से कहा था कि अनपढ़ के दो गाने मुझे दे दो और मेरा सारा संगीत ले लो ।

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इस गाने को आप यहां देख सकते हैं



ये है तलत महमूद का गाया मदन मोहन का एक अनमोल नग़्मा ।

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इस तस्‍वीर में बांई ओर तलत महमूद हैं और दाहिनी ओर हैं मदनमोहन । बीच में जो महाशय हैं उन्‍हें मैं पहचान नहीं पाया ।
इस गाने को आप यहां देख सकते हैं ।


मदनमोहन के गानों की संक्षिप्‍त सूची आप यहां देख सकते हैं

उनकी फिल्‍मों की सूची और उनका लाइफ स्‍केच यहां है

अब आपको अपनी पसंद के गानों को चुनने में देर नहीं लगेगी

मदनमोहन और लता की जोड़ी के गीत आज मैंने अपने ब्‍लॉग पर धिनगाना प्‍लेयर पर भी चढ़ाए हैं । धिनगाना प्‍लेयर इस चिट्ठे पर बांये ऊपर की तरफ है ।




14 comments:

Suresh Chiplunkar June 25, 2007 at 10:46 AM  

यूनुस भाई यह तो आपने धर्मसंकट में डालने वाला सवाल पूछ लिया, रसगुल्ला या आमरस में से क्या पसन्द है ? ये भी कोई सवाल हुआ ? :) खैर.. मुझे सबसे अधिक पसन्द है "दस्तक" का माई री मैं कासे कहूँ.. और "जहाँआरा" का वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग जलते हैं.. अब मदनमोहन के बारे में क्या कहूँ... सिवाय एक बात के कि जब भी मन की तृप्ति चाहिये अकेले में मदनमोहन को सुन लो बस...!

विकास कुमार June 25, 2007 at 10:59 AM  

* दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन
* हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमान
* लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो ना हो...
* नैना बरसे रिमझिम रिमझिम
* ये दुनिया, ये महफ़िल...

उफ्फ्फ्फ़....मुझे अधिकांश गाने पसंद हैं।
क्यों...??? पता नही...! शायद ये संगीत दिल को छूता है। या शायद संगीत मे बोल कुछ इस तरह उभर के सामने आते हैं कि बोल और संगीत एक दुसरे के लिए बने हुए से लगते हैं। आजकल की तरह नहीं।

Anonymous,  June 25, 2007 at 12:01 PM  

Madan Mohan ka naam aate hi mere mann main pahale ek hi ghazal aati hai -

Aapki nazaron ne samajha pyar ke khabil mujhe (Film Anpadh)

Oske baad jhat se ek naam obhar aataa hai - Raja Mehadi Ali khan.

In dono ki jodi ne bahut khoobasoorat ghazale dee. Ek ghazal maine ooper batai hai - jiski yeh line bahut naazuk hai -

Dil ki aei dhadkan tahar jaa
Mil gai manzil mujhe.

Pyaar ka jo ahsaas seconds main ho jata hai ose poori tarah se utaar ke rakh diya gaya hai is ghazal main.

doosara meri pasand ka geet hai film Dastak ka -

Baiyya naa dharon Oo Balamaa

Kamaal ka clasical touch hai. yakeen nahi hota ghazolon ke liye Rag Yaman dene vaale ne yeh geet racha hai.

Teesara geet hai film ek mutti Aasmaan ka -

Har koi chahta hai ek mutti Aasmaan.

philosophical bolo ko bahut acchha sanjoya hai, naa isme classical touch hai aur naa hi ghazal ki ravaangi. yahi tho kammal hai sangeetkaar ka.

Aur bhi bahut se geet pasand hai, lekin top 3 yahi hai.

Annapurna

sunita (shanoo) June 25, 2007 at 12:05 PM  

वाह क्या गाना है...
आपकी नजरो ने समझा...मेरा पसन्दीदा गाना
आपके चिट्ठे को आज मैने अपने फ़ेवरेट में डाल ही लिया...

बहुत-बहुत शुक्रिया...

सुनीता(शानू)

जगदीश भाटिया,  June 25, 2007 at 6:23 PM  

मदन मोहन का संगीत हमारी फिल्मों के स्तर से ऊपर और कहीं बेहतर है. मदन जी के सभी गीत मुझे बहुत पसंद हैं मगर दस्तक का 'तुमसे कहूं इक बात परों से हल्की' बहुत ही यूनीक गाना है, ऐसा गीत हमारे फिल्म इतिहास में आज तक नहीं बना. इस गीत में मदन जी ने बता दिया कि मो. रफी साहब का सही प्रयोग हमारे संगीतकार नहीं कर सके. इसी फिल्म का 'माये री मैं कासे कहूं' गीत भी बहुत ही अलग तरह का गीत है.
बताते हैं कि वीरजारा फिल्म के गीत 'तेरे लिये' का जो संगीत है उसे मदन साहब ने पहले 'दिल ढूढता है' के लिये कम्पोज़ किया था.
क्लासिक में मैलोडी की चाशनी कैसे डाली जाती है और रूह को छू लेने वाला संगीत कैसे तैयार किया जा सकता है यह सिर्फ मदन मोहन ही जानते थे. आजके नयी तकनीक के रिकाडिंग उपकरण यदि उन्हे मिले होते तो शायद दुनिया का महानतम संगीत उन्होंने ही रचा होता.

Udan Tashtari June 25, 2007 at 6:27 PM  

वाह, यूनुस भाई!! क्या तोहफा लाये हो जन्म दिन का मदन मोहन जी के. सभी गानेतो पसंदीदा है, एक को क्या नाम दें. बहुत आभार.

(शीर्षक में मदमोहन को ठीक करके मदन मोहन कर लें) :)

भारत भूषण तिवारी June 25, 2007 at 7:00 PM  

मदन मोहन साहब की बात हो और चेतन आनंद की फ़िल्म 'हक़ीक़त' का ज़िक्र न हो ये सम्भव नहीं. 'मैं ये सोच कर उसके दर से उठा था' कैफ़ी आज़मी की शायरी, रफ़ी साहब की गायकी और मदन मोहन साहब की मौसिक़ी का अद्भुत संगम है. वैसे तो इस फ़िल्म के बाकी गाने जैसे, 'होके मजबूर मुझे', 'ज़रा सी आहट होती है' और फ़िल्म के 'क्लाइमेक्स' में दिल को हिला देने वाला 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों', भी नायाब हैं.

Lavanyam -Antarman June 25, 2007 at 7:29 PM  

Swargiya amar Sangeet Kar Shree Madan Mohan jee ki ruh aaj bhee hunare dilon ke taar jhanjhana rahee hai -- Ek se Ek badhiya Geet denewale us mahan composer ko mere Shat Shat Pranam --
Bhaiyya Sanjeev Kohli ko bhee Dua -- Salaam ! ( Unke bete hain )
aur mere priya Geeton mei hain ~`
1) mai.n to tum sa.ng, nain milaa ke [#1290]
( For the sheer sweetness of a Female singing in futility about the fatal attraction )
2) naGamaa-o-sher kii saugaat kise pesh karuu.N [#218]
( For the Intense imagery of the Shayar & the crystal clear rendition by Swar samragnee Latadi & the classic composition of Madan saab --
3) ye duniyaa, ye mahafil, mere kaam kii nahii.n [#192]
( For the Voice that transcends the Sky & the confining Earth's boundries & crescedo that emerges from the pathos laden SWAR & Taal that emerge from this Madan Mohan ji song to touch & linger on our Senses where we the listener feel the Pain & loss of the subject --
These are in my mind what makes these songs Immortal --
Well, I could express similer sentiments about many of this Masteroes Compositions.
SONGS are those ANGEL's sound that Unite US with the Divine.
( & Sorry to write all this in English ) Hope I'm forgiven because I do not have access to HINDI fonts at this time.
With warmest Rgds to all Music Lover,
humbly,
Lavanya

सिंधु,  June 25, 2007 at 8:39 PM  

मदन मोहन जी को तहे दिल से प्रणाम करती हूँ।

मन्ना डे साहब का गाया "हर तरफ़ अब यही अफ़्साने हैं" मुझे सब से ज़्यादा पसंद है। चराग़ फ़िल्म का "चराग़ दिल का जलाओ" और बावर्ची फ़िल्म का "तुम बिन जीवन कैसा जीवन" ये दो गाने भी बहुत अच्छे लगते हैं।

एक और है, दर्द भरा। ’लैला मजनू’ फ़िल्म का... "बरबाद ए मुहब्बत की दुआ साथ लिए जा"। माशूक को ये गाना बहुत ही प्रिय है। पहली बार जब उन्होने इस गीत को सुनाया था तो मैने रो दिया था। राफ़ी साहब की तो जादू चल गई है इस गीत में। और बोल भी कुछ ऐसे कि बस्स... रोना आ गया। इसके अलावा कुछ गाने हैं जो हम दोनों को पसंद है और अक्सर साथ में सुना करते हैं। जैसे, "तेरी आँखों के सिवा" "लग जा गले" और "मेरा साया साथ होगा"।

भैया, आपने पसंद पूछा तो एहसास हुआ कि मदन मोहन साहब के गाने एक से बढ़कर एक अच्छे हैं और यू तो list बढ़ती चली जाएगी । शायद आप भी हमें यही एहसास दिलाना चाहते थें। जन्मदिन पर उन्हें याद करने का ये तरीका बहुत ही अच्छा लगा।

बहुत शुक्रिया

Neeraj Rohilla June 25, 2007 at 8:40 PM  

यूनुसजी,

आपने तो आज हमारा दिल ही निकाल के रख लिया, कल ही मैं मदन मोहन जी पर कुछ लिखने का सोच रहा था कि आपकी पोस्ट पढी ।

ये रही मेरी पसंद की फ़ेहरिस्त

१) कोई शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं (नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे )
२) नैना बरसे रिमझिम रिमझिम (मदनजी ने इस धुन को रेकार्ड करने के १८ साल पहले तैयार किया था)
३) मुश्किल है जीना, बेदर्दों की दुनिया में,
४) मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गयी सजना
५) ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं
६) वो भूली दासतां लो फ़िर याद आ गयी
७) मेरी आंखो से कोई नींद लिये जाता है
८) आपके पहलू में आकर रो दिये
९) अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने गम दे दो
१०) तेरी आंखो के सिवा दुनिया में रखा क्या है
११) प्रीत लगा के मैने ये फ़ल पाया, सुधबुध खोयी चैन गवाँया
१२) कदर जानी न, हो कदर जानी न
१३) चल दिया दिल मेरा तोड के, यूँ अकेला मुझे छोड के
१४) बैरन नींद न आये
१५) वो जो मिलते थे कभी हमसे दीवानों की तरह
१६) सपनों में अगर मेरे तुम आओ तो सो जाऊ
१७) मेरी आवाज सुनो
१८) बेताब दिल की तमन्ना यही है
१९) मेरे अश्कों का गम न कर ए दिल
२०) कौन आया मेरे मन के द्वारे,

ये २० गीत हैं जो अपनी याद से लिखे हैं, अभी भी बहुत से हीरे छूट गये हैं, लेकिन आशा करता हूँ बाकी लोग टिप्पणी के माध्यम से बता देंगे ।

इतनी बढिया पोस्ट पढाने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद,

नीरज

Vikas June 25, 2007 at 9:08 PM  

मै मदन मोहन जी को इस सदीका हिंदी फिल्म जगतका सर्वश्रेष्ठ संगीतकार मानता हूं. मुझे जो गीत सर्वाधिक प्रिय है वो सभी मदनजी के ही है. विविध भारतीके संगीत सरिता कार्यक्रमने 'मदनजी के गीतोमें शास्त्रीय संगीत' ये लगभग २० कडियोंवाली शृंखला पेश की थी चंद महिनों पहले. वो मुझे बेहद पसंद आयी थी. उसकी निर्माता सुश्री कांचनप्रकाश संगीत थी. आप कृपया उनतक मेरे धन्यवाद पहुंचाने की कृपा करे.
मुझे ये गीत कुछ विशेष प्रिय है.
१. भोर होते कागा पुकारे काहे नाम (चिराग)
२. तुम जो मिल गये हो तो ये लगता है (हंसते जख्म) इस गीतमें रफीजी की जो आवाज है, माशाल्ला उसका जवाब
नही. युनुसभाई, मै कई दिनोंसे आपको पूछनेकी सोच रहा हूं, इस गीतमें फीमेल आवाजमे टायटल की दो लाइन्स
गुनगुनानेकी आवाज किसकी है ? शायद लताजी की ?
३. लगजा गले के फिर ये हंसी रात (वो कौन थी ) और इसी फिल्मसे आशाजी का बेमिसाल गीत
४. शोख नजर की बिजलिया. (ये बात माननी पडेगी ओपी नैय्यर साबके बाद आशाजी को बेहतरीन गाने मदनजी ने दिये है. मिसाल के तौर पर देखिये झुमका गिरा रे.)
५. प्रीतम मेरी दुनियामें दो दिन तो रहे होते (अदा) मै जब भी ये गीत सुनता हूं मेरी आंखे भर आती है.
६. तुम हो साथ रात भी हंसी है (मोहर) इस गीत के प्रारंभ का संगीत रेडिओ श्रीलंका पर 'अनाउन्सर की पसंद' कार्यक्रम की सिग्नेचर ट्यून कितने सालोसे बजता आ रहा है.
७. खेलो ना मेरे दिल से (हकीकत) इस फिल्म के अन्य बेहद लोकप्रिय गीतोंके पीछे ये बेहतरीन गीत जरा दबासा रह
गया है.

जोगलिखी संजय पटेल की June 25, 2007 at 9:46 PM  

कैसे कटेगी ज़िन्दगी तेरे बगै़र ...तेरे बगै़र(फ़िल्म का नाम याद नहीं आ रहा,विविध भारती से बजता रहा है और शायद फ़िल्म जारी भी नहीं हुई है)
रफ़ी साहब की गुलूकारी का एक नायाब हीरा है और क़ायनात ने जैसे मदनमोहन के ह्स्ते ये गीत हम तक पहुँचा दिया है. कम्पोज़िशन का कमाल देखिये और देखिये रफ़ी साहब के कंठ की कारीगरी.जो कंपन मदनजी ने निकलवाया है रफ़ी साहब से वह धुन की ताक़त से ही उपजता है.मुझे ले चल(शराबी)भी रफ़ी साहब की आवाज़ में है और मेरा दावा है कि इस नज़्म का कंपोज़िशन हकीक़त की नज़्म(मै ये सोच उसके दर से उठा था) से बेहतर बन पडा़ है.वैसे मदनजी की हर धुन दिल के जज़ाबात की तर्जुमानी है लेकिन उल्लेखित रचनाओं को ज़रा ध्यान से सुनिये लगेगा कि ज़िन्दगी की सारी की सारी तल्ख़ियों को सिर्फ़ और सिर्फ़ मदनमोहन का संगीत ही अभिव्यक्त कर सकता है.

Udan Tashtari June 26, 2007 at 6:03 AM  

यह लिजिये यूनुस भाई हमारी पसंद, जो बताना चाह रहे है:

नैना बरसे रिमझिम रिमझिम
आपके पहलू में आकर रो दिये
कौन आया मेरे मन के द्वारे
चराग़ दिल का जलाओ
दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन

--अब सुनवाइये यह गीत. :) एक बार आप अपनी आवाज के साथ पॉड कास्टिंग के जरिये फरमाईशी गीतों के मुखडे सुनवाये, जैसे कि हम रेडियो सुन रहे हों. बस दिल की बात कही है, सुविधा आप देख लें. मदद हर तरफ से हाजिर है. शुभकामनायें.

उन्मुक्त June 26, 2007 at 7:53 PM  

'आपकी नजरों ने समझा' मन को छूने वाले शब्द हैं।

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