संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।

Tuesday, June 26, 2007

ये रहे संगीतकार मदनमोहन के आपके पसंदीदा गीत । जिन्‍हें आगे चलकर मैं अपने अगले पॉडकास्‍ट में सुनवाऊंगा ।



मदनमोहन की याद में मैंने जो पोस्‍ट लिखी थी, उसके जवाब में आप सबने इतनी शिद्दत से लिखा कि मज़ा ही आ गया । इससे ये साबित होता है कि आप सब मदनमोहन को कितना प्‍यार करते हैं ।



भाई उड़न तश्‍तरी ने कहा कि इसका तो पॉडकास्‍ट होना चाहिये । मुझे लगा बात में दम है । तो थोड़ा समय दीजिये पॉडकास्‍ट भी हाजिर हो जायेगा । फिलहाल अपनी प्रतिक्रियाओं में आपने जो गीत बताए । उन्‍हें संयोजित करके प्रस्‍तुत कर रहा हूं । पॉडकास्‍ट की प्रतीक्षा कीजिए ।



भाई सुरेश चिपलूणकर ने कहा कि यूनुस भाई आपने तो धर्मसंकट में डाल दिया, वैसे उन्‍हें फिल्‍म दस्‍तक का ये गीत ज्‍यादा पसंद है--


माई री मैं कासे कहूं, इसमें खुद मदनमोहन की आवाज़ आती है ।



इसके अलावा सुरेश जी को जहांआरा फिल्‍म ये गीत भी पसंद है !


वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ के जलते हैं




भाई भारत भूषण तिवारी का कहना है कि मदन मोहन साहब की बात हो और चेतन आनंद की फ़िल्म 'हक़ीक़त' का ज़िक्र न हो ये सम्भव नहीं.


'मैं ये सोच कर उसके दर से उठा था'


उनके मुताबिक़ कैफ़ी आज़मी की शायरी, रफ़ी साहब की गायकी और मदन मोहन साहब की मौसिक़ी का अद्भुत संगम है. वैसे तो इस फ़िल्म के बाकी गाने जैसे, 'होके मजबूर मुझे', 'ज़रा सी आहट होती है' और फ़िल्म के 'क्लाइमेक्स' में दिल को हिला देने वाला 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों', भी नायाब हैं.


दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के रात दिन — फिल्‍म मौसम


ये गीत सबसे ऊपर है विकास कुमार की लिस्‍ट में । दो विकास हैं इस लिस्‍ट में । एक विकास शुक्‍ल पूना के और दूसरे विकास कुमार मुंबई आई आई टी के । इसके अलावा उन्‍हें पसंद हैं ये गीत—


हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमान ।


लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो ना हो...


नैना बरसे रिमझिम रिमझिम


ये गीत विकास के साथ साथ हमारे उड़नतश्‍तरी यानी भाई समीर लाल जी को भी बहुत पसंद है । और हां नीरज रोहिल्‍ला कहते हैं कि इस गीत की धुन मदनमोहन ने रिकॉर्डिंग के अठारह साल पहले ही तैयार कर ली थी ।



विकास की पसंद का अगला गीत है ‘ये दुनिया ये महफिल’


वो कहते हैं मुझे मदनमोहन के अधिकांश गाने पसंद हैं । क्यों...??? पता नही...! शायद ये संगीत दिल को छूता है। या शायद संगीत मे बोल कुछ इस तरह उभर के सामने आते हैं कि बोल और संगीत एक दुसरे के लिए बने हुए से लगते हैं । आजकल की तरह नहीं ।



उड़नतश्‍तरी के पसंद के गीतों की सूची ये रही


नैना बरसे रिमझिम रिमझिम



आपके पहलू में आकर रो दिये



कौन आया मेरे मन के द्वारे



चराग़ दिल का जलाओ



दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन




हैदराबाद की अन्‍नपूर्णा जी कहती हैं कि मदनमोहन का नाम आते ही सबसे पहले मन में एक गीत उभरता है—फिल्‍म अनपढ़ का । यही गीत सुनीता शानू जी को भी पसंद है । अन्‍नपूर्णा जी कहती हैं कि राजा मेंहदी अली खां और मदन मोहन की जोड़ी ने कमाल के गीत दिये


हैं । इस गाने की ये पंक्ति कमाल की है ।



दिल की ऐ धड़कन संभल जा मिल गयी मंजिल मुझे



प्‍यार का जो अहसास सेकेन्‍ड्स में हो जाता है उसे पूरी तरह उतार कर रख दिया गया है इस ग़ज़ल में ।



इसके बाद इन्‍हें बैंयां ना धरो और एक मुट्ठी आसमान---


ये गाने पसंद हैं । इनका कहना है कि दार्शनिक बोलों को मदनमोहन बड़ी ही खूबसूरती से संजोया है धुन में । ना इसमें ग़ज़ल की रवानी है और ना ही क्‍लासिकल गीतों वाला स्‍पर्श । फिर भी ये गीत अनमोल है ।



जगदीश भाटिया जी का कहना है कि मदन मोहन का संगीत हमारी फिल्मों के स्तर से ऊपर और कहीं बेहतर है. मदन जी के सभी गीत मुझे बहुत पसंद हैं मगर दस्तक का 'तुमसे कहूं इक बात परों से हल्की' बहुत ही यूनीक गाना है, ऐसा गीत हमारे फिल्म इतिहास में आज तक नहीं बना. इस गीत में मदन जी ने बता दिया कि मो. रफी साहब का सही प्रयोग हमारे संगीतकार नहीं कर सके. इसी फिल्म का 'माये री मैं कासे कहूं' गीत भी बहुत ही अलग तरह का गीत है.



बताते हैं कि वीरजारा फिल्म के गीत 'तेरे लिये' का जो संगीत है उसे मदन साहब ने पहले 'दिल ढूढता है' के लिये कम्पोज़ किया था. क्लासिक में मैलोडी की चाशनी कैसे डाली जाती है और रूह को छू लेने वाला संगीत कैसे तैयार किया जा सकता है यह सिर्फ मदन मोहन ही जानते थे. आजके नयी तकनीक के रिकाडिंग उपकरण यदि उन्हे मिले होते तो शायद दुनिया का महानतम संगीत उन्होंने ही रचा होता.



संजय पटेल इंदौर से लिखते हैं कि कैसे कटेगी ज़िन्दगी तेरे बगैर ये गीत विविध भारती से बजता रहा है, मुझे इसकी फिल्‍म का नाम याद नहीं और शायद फ़िल्म जारी भी नहीं हुई है, रफ़ी साहब की गुलूकारी का एक नायाब हीरा है और क़ायनात ने जैसे मदनमोहन के ह्स्ते ये गीत हम तक पहुँचा दिया है. कम्पोज़िशन का कमाल देखिये और देखिये रफ़ी साहब के कंठ की कारीगरी.जो कंपन मदनजी ने निकलवाया है रफ़ी साहब से वह धुन की ताक़त से ही उपजता है.



मुझे ले चल(शराबी)



ये गाना भी रफ़ी साहब की आवाज़ में है और मेरा दावा है कि इस नज़्म का कंपोज़िशन हकीक़त की नज़्म(मै ये सोच उसके दर से उठा था) से बेहतर बन पडा है.वैसे मदनजी की हर धुन दिल के जज़ाबात की तर्जुमानी है लेकिन उल्लेखित रचनाओं को ज़रा ध्यान से सुनिये लगेगा कि ज़िन्दगी की सारी की सारी तल्ख़ियों को सिर्फ़ और सिर्फ़ मदनमोहन का संगीत ही अभिव्यक्त कर सकता है.



नीरज रोहिल्‍ला कहते हैं आपने तो आज हमारा दिल ही निकाल के रख लिया, कल ही मैं मदन मोहन जी पर कुछ लिखने का सोच रहा था कि आपकी पोस्ट पढी ।



इसके बाद इन्‍होंने बीस गानों की एक लिस्‍ट पेश कर दी है ।


१) कोई शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं (नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे )



२) नैना बरसे रिमझिम रिमझिम (मदनजी ने इस धुन को रेकार्ड करने के १८ साल पहले तैयार किया था)



३) मुश्किल है जीना, बेदर्दों की दुनिया में,



४) मैं तो तुम संग नैन मिला के हार गयी सजना



५) ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं



६) वो भूली दासतां लो फ़िर याद आ गयी



७) मेरी आंखो से कोई नींद लिये जाता है



८) आपके पहलू में आकर रो दिये



९) अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने गम दे दो



१०) तेरी आंखो के सिवा दुनिया में रखा क्या है



११) प्रीत लगा के मैने ये फ़ल पाया, सुधबुध खोयी चैन गवाँया



१२) कदर जानी न, हो कदर जानी न



१३) चल दिया दिल मेरा तोड के, यूँ अकेला मुझे छोड के



१४) बैरन नींद न आये



१५) वो जो मिलते थे कभी हमसे दीवानों की तरह



१६) सपनों में अगर मेरे तुम आओ तो सो जाऊ



१७) मेरी आवाज सुनो



१८) बेताब दिल की तमन्ना यही है



१९) मेरे अश्कों का गम न कर ए दिल



२०) कौन आया मेरे मन के द्वारे,



ये २० गीत हैं जो अपनी याद से लिखे हैं, अभी भी बहुत से हीरे छूट गये हैं, लेकिन आशा करता हूँ बाकी लोग टिप्पणी के माध्यम से बता देंगे ।




विकास शुक्‍ल कहते हैं कि मै मदन मोहन जी को इस सदी का हिंदी फिल्म जगत का सर्वश्रेष्ठ संगीतकार मानता हूं. मुझे जो गीत सर्वाधिक प्रिय है वो सभी मदनजी के ही है. मुझे ये गीत कुछ विशेष प्रिय है.



१. भोर होते कागा पुकारे काहे नाम (चिराग)



२. तुम जो मिल गये हो तो ये लगता है (हंसते जख्म) इस गीतमें रफीजी की जो आवाज है, माशाल्ला उसका जवाब नही. युनुसभाई, मै कई दिनों से आपको पूछने की सोच रहा हूं, इस गीत में फीमेल आवाज में टायटल की दो लाइन्स गुनगुनाने की आवाज किसकी है ? शायद लताजी की ?


(बिल्‍कुल सही कहा । ये लता जी की आवाज़ है विकास भाई—यूनुस)




३. लगजा गले के फिर ये हंसी रात (वो कौन थी )


और इसी फिल्मसे आशाजी का बेमिसाल गीत



४. शोख नजर की बिजलियां.


(ये बात माननी पडेगी ओपी नैय्यर साहब के बाद आशाजी को बेहतरीन गाने मदनजी ने दिये है. मिसाल के तौर पर देखिये झुमका गिरा रे.)



५. प्रीतम मेरी दुनियामें दो दिन तो रहे होते (अदा)
मै जब भी ये गीत सुनता हूं मेरी आंखे भर आती है.



६. तुम हो साथ रात भी हंसी है (मोहर)


इस गीत के प्रारंभ का संगीत रेडिओ श्रीलंका पर 'अनाउन्सर की पसंद' कार्यक्रम की सिग्नेचर ट्यून कितने सालोसे बजता आ रहा है.



७. खेलो ना मेरे दिल से (हकीकत)


इस फिल्म के अन्य बेहद लोकप्रिय गीतोंके पीछे ये बेहतरीन गीत जरा दबासा रह गया है.



सिंधु श्रीधरण अमरीका में पढ़ाई कर रही हैं । वो कहती हैं कि मैं मदन मोहन जी को तहे दिल से प्रणाम करती हूँ।


मन्ना डे साहब का गाया "हर तरफ़ अब यही अफ़्साने हैं" मुझे सब से ज़्यादा पसंद है।



चराग़ फ़िल्म का "चराग़ दिल का जलाओ"



और बावर्ची फ़िल्म का "तुम बिन जीवन कैसा जीवन" ये दो गाने भी बहुत अच्छे लगते हैं।



एक और है, दर्द भरा गीत ’लैला मजनू’ फ़िल्म का... "बरबाद ए मुहब्बत की दुआ साथ लिए जा"। प्‍यार करने वालों को ये गाना बहुत ही प्रिय है । मेरे क़रीबी दोस्‍त को भी ये गीत बहुत पसंद है । जब पहली बार उन्‍होंने मुझे ये गीत सुनाया था था तो मैं रो दी थी । रफ़ी साहब का तो जादू चल गया है इस गीत में और बोल भी कुछ ऐसे कि बस्स... रोना आ गया।



इसके अलावा कुछ गाने हैं जो हम दोनों को पसंद है और अक्सर साथ में सुना करते हैं । जैसे, "तेरी आँखों के सिवा" "लग जा गले" और "मेरा साया साथ होगा"।



भैया, आपने पसंद पूछा तो एहसास हुआ कि मदन मोहन साहब के गाने एक से बढ़कर एक अच्छे हैं और यू तो list बढ़ती चली जाएगी । शायद आप भी हमें यही एहसास दिलाना चाहते थें। जन्मदिन पर उन्हें याद करने का ये तरीका बहुत ही अच्छा लगा।


बहुत शुक्रिया ।




अमेरिका से ही लावण्‍या शाह जी ने कहा है कि स्‍वर्गीय अमर संगीतकार मदनमोहन जी की रूह आज भी हमारे दिलों के तार झनझना रही है । एक से एक बढिया गीत देने वाले इस संगीतकार को मेरा शत शत प्रणाम । संजीव कोहली उनके बेटे हैं । मैं उन्‍हें भी प्रणाम करती हूं


इसके बाद लावण्‍या जी ने अपने पसंदीदा गीतों की एक लिस्‍ट प्रस्‍तुत की है ।



ये रही---


1. मैं तो तुम संग नैन लड़ा के हार गई सजना ।


शिद्दत से प्‍यार करने वाली प्रेमिका के बेहद समर्पित स्‍वर की अपार मिठास की वजह से मुझे ये गीत पसंद है ।


2. नग्‍मा ओ शेर की सौग़ात किसे पेश करूं ।


शायर की ज़बर्दस्‍त कल्‍पना और स्‍वर साम्राज्ञी लता जी की साफ़ शफ्फाफ़ आवाज़ की वजह से और मदन मोहन की क्‍लासिक कंपोज़ीशन की वजह से ये गीत पसंद है ।


3. ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं ।


एक ऐसी आवाज़ के लिए ये गीत पसंद है जिसमें आकाश की ऊंचाईयां और ज़मीन की गहराईयों समाई हुई हैं । मदनमोहन के संगीत से स्‍वर और ताल का वो समां बंधता है कि कि हमारा दिल भी इस गाने के भावों के साथ दर्द और ख़लिश से भर जाता है ।


ये ऐसे गाने हैं जो अमर हैं ।



इसके बाद उन्‍होंने अंग्रेज़ी में ये अद्भुत जुमला लिखा है


SONGS are those ANGEL's sound that Unite US with the Divine.

13 comments:

विकास कुमार June 26, 2007 at 11:25 AM  

पोडकास्ट का बेसब्री से इंतज़ार है। :)

Anonymous,  June 26, 2007 at 11:34 AM  

Sabne apni-apni pasand batha dee.

Ab jaldi top 10 suna deejeeye.

Annapurna

सिंधु,  June 26, 2007 at 12:20 PM  

जी, सब के comments तो पहले से ही पढ़ लिए थें...

और हाँ भैया, एक छोटी सी correction... हम कनाडा में हैं, टोरोन्टो के पास। और तो आपने पढ़ाई का इल्ज़ाम भी लगा लिया है :))

मज़ाक अपनी जगह... हमें आपके podcast का इंतज़ार रहेगा।

Anonymous,  June 26, 2007 at 1:56 PM  

Priy Yunus bhai aur anya mitron,

Madanji ki smriti mein mera vinamra naman!!!

Vaise to jin geeton ka zikra kiya gaya, woh sab aap hi ki tarah mere bhi pasandeeta hain, kuch anya madhur geeton ka bhi zikra yahaan kar raha hoon

1) Mukh mod na lena sajna (Ashiana/1951/Rajendra Krishna/Latadidi)
2) Chand Mardham hai (Railway Platform/1956/Sahir Ludhianvi/Latadidi)
3)Naino main pyar dole (Sheroo/1957/Rajendra Krishna/Latadidi)
4)Do ghadi woh jo paas aa baithe (Gateway of India/1957/Rajendra Krishna/Latadidi & Mohd Rafisaab)
5)Aja kahin se aaja (Samundar/1957/Rajendra Krishna/Latadidi)
6)Meri Veena Tumbin roye (Dekh kabira roya/1958/Rajendra Krishna/Latadidi)
7)Tu pyar kare ya thukraye (Dekh kabira roya/1958/Rajendra Krishna/Latadidi)
8)Thodi der ke liye (Akeli mat jaiyo/1963/Majrooh/Ashaji)
9) Aai ab ke saal diwali (Haqeeqat/1964/Kaifi Azmi/Latadidi)
10)Dil khush hai (Ghazal/1964/Sahir Ludhianvi/Modh Rafi saab)
11)Na tum bewafa ho (Ek Kali muskayi/1967/Rajendra Krishna/Latadidi - perhaps the best background score ever by Madanji- the violin is incredibly amazing)
12) Ari o shokh kali (Jab yaad kisi ki aati hain/1967/Raja Mehdi alikhan/Mahendra Kapoorji)
13) Aaj socha to aansoo bhar aaye (Heer Ranjha/1970/Kaifi Aazmi/Latadidi)
14)Chaayi barkha bahhar (Chiraag/1970/Majroohsaab/didi)- Is gaane ki recording se pehle madanji ne aur logon se kaha tha ke "dekhna main lata se 'chaayee' kaise ganwata hoon".

In ke alawa, Mushkil hai jeena, Khelo na mere dil se(Haqeeqat), Betaab dil ki tamanna (Haste Zakhm/1973/Kaifi saab/didi), Bhor hote kaaga (chirag/1970/majrooh saab/didi), Preetam meri duniya main (Ada/1951/Rajendra krishanji/didi) aur rasm-e-ulfat bhi mere priya geet hain. Madanji ke sangeet ke baare main to kitna bhi likhen kam hain, phil haal, unki smriti main mera koti koti pranaam.

Jai hind/Binoj

Udan Tashtari June 26, 2007 at 7:19 PM  

वाह, यूनुस भाई. आपने हमारा निवेदन स्विकार किया, साधुवाद.

अब आयेगा मजा-आपकी प्रस्तुति का अंदाज और यह मधुर संगीत, इन्तजार सा लग गया है. :)

sajeev sarathie June 26, 2007 at 7:32 PM  

madan mohan is my favourite too yunus bhai

Neeraj Rohilla June 26, 2007 at 9:16 PM  

Yunusji,
One of my friend wrote this piece on Madan Mohan for an online group. I am quoting it for you.
-----------------------
June 25,

It is hard to imagine that in what is today the cauldron of death was born, a little over 80 years ago, a man whose music embodied the very essence of life.

From songs of silliness, mischief, joy and exhilaration to the deepest floors of despair, melancholy and world-weariness.

If for some reason, there were to be only three music directors for Hindi films, one of them would be for me Madan Mohan.

By divine coincidence, this Sunday I just happened to listen to Asha Bhosle's Legends CD # 2 - and what does it open with but Madan Mohan speaking of his 'chhoti behen' :

- uski awaaz ka jadoo - bayaan se bahaar
- shokhi aur chulbulaapan uske gaane ki bahut badi khoobi hai...

In all this, one facet of Madan Mohan's songs is striking.

All the world listens to, writes about, hears in various compilations, and revels in the sight of the majestic heights that are known as 'Lata Mangeshkar for Madan Mohan'.

As one Internet article puts it:

"(She)... christened him 'The Emperor Of Ghazals'. She should know because it is in her voice that Madan Mohan created all those masterpieces that set an impossibly high standard for ghazals in films."

What is an oddity in all this - and something known to any diligent fan of MM
- is that while composing all those searing melodies for Lata, he put an equal amount of his faith in Asha Bhosle.

Yes, indeed - a mere 20 visits to the microphone, over a span of 20+ career years separate his recordings for Lata and Asha: 210 for Lata, 190 for Asha (as per V. Nerurkar, who by the way, publishes his Madan Mohan anthology today).

Such is the large shadow of Lata for MM, that while we can easily count, say, 20 of her songs, we'd be hard-pressed to do the same for Asha with MM.

It would seem that by and large, he gave Asha the high-spirited, full of 'shokhi and chulbulaalan' songs, while reserving his soaring ghazals for Lata.

His serious Lata and vivacious Asha - nowhere is this summed up more aptly than in Adalat's 'ja ja ja re sajna', where the two sisters render their different spirits in the same song.

And so, with this long prelude, here is to the wonderful songs for Asha Bhosle by Madan Mohan!

Neend Hamari Khwab Tumhare heads my list. A film where MM did not use Lata at all. Two outstanding duets with Rafi, one sentimental gem (koi shikwa bhi nahin) and a Certified Desert Islander - bheegi hui is raat ka aanchal kehtaa hai... ooooof... what a song this is.. go find an RDB or OPN to create something like this one.

While the song from Mera Saaya is the most popular, my # 1 favorite has to be the 'let's-upend- big-sister- with-all- her-greats' Woh Kaun Thi's 'shokh nazar ki bijliyaan'.. ... another one of these songs where you wonder just what type of genius would be able to come up with such a brilliant tune.

Other MM-Asha gems that come to mind -

Akeli Mat Jaiyo - thodi der ke liye
Aakhri Dao - humsafar saath apna - with Rafi
Parwana - jis din se maine - with Rafi
From the unreleased songs album - a stunning number - phir wohi shyaam...

As I said, that's not even a dozen. There's at least another 150+ Asha songs out there. On the birth anniversary of Madan Mohan, they must be worth a recall.

Regards,

Robin

रजनीश मंगला June 27, 2007 at 1:28 AM  

एक गाना भूल गए ले हैं आप। 'रुके रुके से कदम, रुक के बार बार चलें'

Rodrigo,  June 27, 2007 at 6:32 AM  

Oi, achei teu blog pelo google tá bem interessante gostei desse post. Quando der dá uma passada pelo meu blog, é sobre camisetas personalizadas, mostra passo a passo como criar uma camiseta personalizada bem maneira. Até mais.

Rodrigo,  June 27, 2007 at 6:32 AM  

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sootradhaar June 28, 2007 at 4:43 AM  

यूनुस जी ...'दस्तक' का एक और मधुर गीत ...लता जी कि आवाज़ में ...'बैय्यां ना धरो ...ओ बलमा ...'...इसको भी अगर अपने पोडकास्ट में शामिल करें तो आभार होगा...:)

Malay Mani November 5, 2011 at 4:07 PM  

Namaskar Yunisji..

kya kahu me.. mere liye to jaise meri khoyi hui duniya dubara mil gayi.
jab se gaaon chor ke shahar aaya hun.. vividh bharti ko itna yaad karta hun ki mat puchiye... lagbhag 4-5 saalon se niyamit nahi sun raha hoon .. kyonki delhi me ye fm par uplabdh nahi hai..idhar online pata chala to online hi sun raha hoon/ .khair,,,abhi jo charha hai..usme MADAN MOHAN ke gaano me mera sabse pasndida gaan..DASTAK ka hai... 'MMAI RI ME KA SE KAHU ''

MALAY KUMAR MANI

sunil September 29, 2014 at 10:35 PM  

यूनुस भाई ....मेरे विचार में लताजी और मदन मोहनजी ने जो बेमिसाल काम अदालत फिल्म के गीतों में किया है , वो अदभुद है .... यूं हस्रतो के दाग़ .....और हम कुछ नहीं कहते ...शायद सर्वकलीन महान रचनाएँ हैं ...इनके अलावा आज सोचा तो आँसू भर आए में राइस ख़ान साहब के सितार ने अंतरों में कमाल की जादूगरी की है .....

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