कल मैंने रेडियोवाणी पर येसुदास का गाया और डॉ0 हरवंशराय बच्चन का लिखा गीत प्रस्तुत किया था । अफलातून जी की टिप्पणी आई कि फिल्म आलाप के और गीत सुनवाए जाये । मेरी खुद की इच्छा यही थी कि इस फिल्म के कुछ और गीतों का सिलसिला चलाया जाए ।
आपको ये जानकर हैरत होगी कि आलाप के ज्यादातर गीत डॉ0 राही मासूम रज़ा ने लिखे थे । इतनी शुद्ध हिंदी और इतना लालित्य कि क्या कहें । राही साहब की कलम से निकले कुछ अनमोल गीतों में से हैं ये गीत । राही की कुछ ग़ज़लें आप रेडियो
वाणी पर पहले भी सुन चुके हैं ।
तो आईये आज सुना जाये ये गीत । जो सुबह सुबह प्रेरणा देने का काम भी करेगा । और शायद आप दिन भर यही गुनगुनाएं--जिंदगी को संवारना होगा, दिल में सूरज उतारना होगा ।
ये जो 'दिल में सूरज उतारने' वाली बात है इस पर हमारा दिल आ गया है । येसुदास की गाढ़ी और शहद जैसी आवाज़ अंतरतम की गहराईयों में छा जाती है । एक खुश्बू सी बिखेर देती है ।

मैं सोच रहा हूं कि रेडियोवाणी पर अगले कुछ दिन येसुदास के गीतों के नाम कर दिये जायें । आपकी क्या राय है । इस गीत के ज़रिए हम संगीतकार जयदेव की प्रतिभा को भी सलाम कर रहे हैं । कमाल का संगीत दिया है उन्होंने इस फिल्म में । तो आईये इस गीत के ज़रिए जिंदगी को संवारें ।
जिंदगी को संवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा ।।
जिंदगी रात नहीं, रात की तस्वीर नहीं
जिंदगी सिर्फ़ किसी ज़ुल्फ़ की ज़ंजीर नहीं
जिंदगी बस कोई बिगड़ी कोई तस्वीर नहीं
जिंदगी को संवारना होगा ।।
जिंदगी धूप नहीं, साया-ऐ-दीवार भी है
जिंदगी धार नहीं, जिंदगी दिलदार भी है
जिंदगी प्यार भी है प्यार का इक्ररार भी है
जिंदगी को उभारना होगा ।।
जिंदगी को संवारना होगा ।।
इंतज़ार कीजिए कल का । कल आपको सुनवाया जायेगा 'फिर भी' फिल्म का एक शानदार और दुर्लभ गीत ।
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