संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।

Tuesday, December 25, 2007

नहीं रहे रेडियो के शिखर पुरूष गोपाल दास जी

कल यानी चौबीस दिसंबर को गोपालदास जी का जयपुर में निधन हो
गया ।

अगर आप रेडियो के अटूट प्रेमी हैं तो गोपालदास जी के नाम से अवश्‍य परिचित होंगे । अगर आप पत्रकारिता और प्रसारण के विद्यार्थी रहे हैं तो भी गोपाल दास जी का नाम आपके लिए अपरिचित नहीं होगा । गोपाल दास जी भारत में रेडियो प्रसारण के शिखर-पुरूषों में से एक रहे हैं । गोपाल दास जी को श्रद्धांजली दे रहा है रेडियोनामा । आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए ।

3 comments:

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल December 25, 2007 at 12:39 PM  

यूनुस भाई,
मेरे जयपुर के गौरव गोपाल दास जी को आपने श्रद्धा पूर्वक स्मरण किया, कृतज्ञ हूं. गोपाल दास जी से कुल जमा दो बार मिलने का और 8-10 बार दूर से उनके दर्शन करने का सौभाग्य मिला है. उनका एक लेख 'वह जो चली गई' वर्षों पढाता रहा हूं, और मुझे याद नहीं आता कि एक बार भी उसे पूरा पढा सका हूं. हर बार बीच में ही रोने लग जाता था. उन्होंने आकाशवाणी के लिए जो किया, उसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा. मेरी भी विनम्र श्रद्धांजलि.

vijayshankar December 29, 2007 at 1:13 AM  

यूनुस, यह दारुण समाचार है!

Anonymous,  February 2, 2008 at 6:25 PM  

Younus bhai,pichale 4-5 din se mujhe apaka blog mila......mai vivid bharti ki niyamit shrota hu pichale karib 30 salonse...aur iske jaisa koi aur channel nahi hai
aaj maine gopaldasji ke bareme padha.......aur unke bareme mai bahot kuchh jan pai...thnx for giving us such a valuable information.ab soch liya hai...... roj apke is blog pe visit karungi.

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