संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।

Tuesday, May 29, 2007

अल्‍ला मेघ दे पानी दे छाया दे रे तू रामा मेघ दे-सचिन देव बर्मन के बहाने बारिश का इंतज़ार


प्रिय मित्रो जब भी तपती हुई गरमी के दिन आते हैं और ये तपिश बर्दाश्‍त से बाहर हो जाती है तो मुझे फिल्‍म गाईड याद आती है । गाईड में देव आनंद सन्‍यासी का भेस धरे हुए हैं और गांव वाले उनसे बिनती करते हैं कि वो किसी तरह इंद्रदेव को मनायें और बारिश ला दें । कुछ यही सीक्‍वेंस है, जब सचिन दा की आवाज़ में एक गाना पृष्‍ठभूमि में बजता है ‘मेघ दे पानी दे रामा मेघ दे’ । उफ़ कितना दर्द और कितनी विकलता है उस आवाज़ में । ऊपर से विजय आनंद ने दृश्‍य भी बड़े मार्मिक रखे हैं । इसलिये जब भी संसार गर्मी से त्रस्‍त हो जाता है, मुझे सचिन दा की आवाज़ की छांह में सुकून मिलता है । ये गीत इंटरनेट पर मिल नहीं रहा था, भाई सागर चंद नाहर ने मेरे लिये ये गीत कहीं से ढूंढ निकाला है । उन्‍हें बहुत बहुत शुक्रिया । पेश है ।

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अल्‍ला मेघ दे पानी दे छाया दे रे तू रामा मेघ दे ।

आंखें फाड़े दुनिया देखे आज ये तमाशा


हाय रे विश्‍वास मेरे हाय मेरी आशा ।।

अल्‍ला मेघ दे पानी दे छाया दे रे तू रामा मेघ दे ।।



ये शैलेन्‍द्र की रची पंक्तियां हैं । जिन पर फिर कभी चर्चा की जाएगी ।

बहरहाल, बर्मन दा पर लिखने की एक वजह ये भी है कि 2006 बर्मन दा का जन्‍मशती वर्ष था, भूले भटके कुछ लोग इस पूरे साल बर्मन दा का जन्‍मशती समारोह मना रहे
हैं । त्रिपुरा के राजकुमार थे सचिन दा और वहां के मछुआरे आज भी बर्मन दा के नग्‍मे गुनगुनाते हुए मछलियां पकड़ते हैं । एन0डी0टी0वी0 पर मैंने बर्मन दा पर त्रिपुरा से एक बहुत सुंदर रिपोर्ट देखी थी और रोमांचित हो गया था ।

बर्मन दा को संगीतकार के रूप में तो सभी जानते हैं लेकिन एच0एम0वी0 ने कभी बर्मन दा के गाये गीतों का एक कैसेट जारी किया था, जिसे मेरे छोटे भाई ने कहीं से खोजकर खरीद लिया था । उसमें बर्मन दा के सारे नग्‍मे थे । वो नग्‍मे जो आपने कहीं ना कहीं सुने होंगे और वो भी जो आपने शायद कहीं नहीं सुने होंगे । जैसे चालीस के दशक की फिल्‍म ताजमहल के गीत । चले चलो प्रेम के राही । प्रेम प्‍यार की निशानी ताजमहल ।
या फिर भंवरा फिल्‍म के गीत—उड़ गया पंछी । और प्रेम का पिंजरा । मैं प्रयास करूंगा कि जल्‍दी ही नेट पर चढ़ाकर ये गीत आप तक पहुंचाऊं ।

बर्मन दा की आवाज़ में एक दर्द है, दर्द कहने से बात नहीं बनती, उनकी आवाज़ के लिए पीड़ा और विकलता जैसे शब्‍द सही बैठते हैं । एक गायक के रूप में उन्‍होंने हिंदी संगीत को भटियाली शैली से परिचित कराया है । भटियाली वो गीत हैं जो बंगाल की सरज़मीं पर नाव खेते मल्‍लाह गाया करते हैं । उनमें दार्शनिकता का अपार पुट होता है । बर्मन दा का मन दरअसल एक मल्‍लाह का मन था । उन्‍होंने जो भी गीत गाये उसमें एक मल्‍लाह की दार्शनिकता है । तूफानी लहरों की गोद में अपनी नौका उतारने के बाद ये तय नहीं होता कि शाम को मल्‍लाह वापस लौट पायेंगे या नहीं । वो ईश्‍वर के भरोसे होते हैं ।

बर्मन दा का फिल्‍म जिंदगी जिंदगी का ये गीत सुनिए । मेरी जानकारी के मुताबिक इस फिल्‍म के लिये बर्मन दा को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिला था ।

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जिंदगी ऐ जिंदगी तेरे हैं दो रूप

बीती हुई रातों की बातों की तू छाया

छाया वो जो बनेगी धूप ।। जिंदगी ऐ जिंदगी तेरे हैं दो रूप ।।

कभी तेरी किरणें थीं ठंडी ठंडी हाय रे

अब तू ही मेरे जी में आग लगाये

चांदनी ऐ चांदनी तेरे हैं दो रूप ।। जिंदगी ऐ जिंदगी तेरे हैं दो रूप ।।

आते जाते पल क्‍या हैं समय के ये झूले हैं

बिछड़े साथी कभी याद आये कभी भूले हैं

आदमी ऐ आदमी तेरे हैं दो रूप ।।

कोई भूली हुई बात मुझे याद आई है

खुशी भी तू लाई थी और आंसू भी तू लाई है

दिल्‍लगी ऐ दिल्‍लगी तेरे हैं दो रूप

कैसे कैसे वादों की तू यादों की तू छाया

छाया वो जो बनेगी धूप ।। जिंदगी ऐ जिंदगी तेरे हैं दो रूप ।।


ये गीत आनंद बख्‍शी ने लिखा है । सन 1972 में आई फिल्‍म जिंदगी जिंदगी के लिए ।


जिंदगी जिंदगी फिल्‍म के इस गाने का शिल्‍प कमाल का है । आनंद बख्‍शी से बहुत ही गहरी बात कही है कि हम सब के दो रूप होते हैं । हम सही मायनों में संसार के रंगमंच के एक अभिनेता हैं । बाहर से हम कुछ और हैं और भीतर से कुछ और । भीतर से कैसे हैं हम, ये जानने के लिए बहुत अकेले हों तो मन के भीतर झांक कर देखना पड़ता है । कभी कभी हैरत होती है कि जैसा बर्ताव हम करते हैं, वैसा करते क्‍यों हैं । कई बार हमें भीतर से पता होता है कि ये हम ग़लत कर रहे हैं । पर करते चले जाते हैं । बहरहाल इस फिल्‍म का एक गीत और है—पिया तूने क्‍या किया रे, इसकी चर्चा हम इस लेख के अगले हिस्‍से में करेंगे । फिलहाल गाईड फिल्‍म के एक और गाने की बात ।

इस गाने में भी जिंदगी की एक सच्‍चाई है, एक फ़लसफ़ा है । और यक़ीन मानिए इससे पहले के गीत और ये गीत भी, अगर बर्मन दा के सिवाय किसी और की आवाज़ में होता तो उनका असर चला जाता । उनमें वो गहराई नहीं आ सकती थी । ज़रा गाईड फिल्‍म का ये गीत सुनिए और सुनते सुनते पढिए भी ।

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वहां कौन है तेरा, मुसाफिर जायेगा कहां

दम ले ले घड़ी भर, ये छैंया पायेगा कहां ।।

बीत गये दिन, प्‍यार के पलछिन,


सपना बनी वो रातें

भूल गये वो, तू भी भुला दे


प्‍यार की वो मुलाक़ातें

सब दूर अंधेरा, मुसाफिर जायेगा कहां ।। वहां कौन है तेरा ।।

कोई भी तेरी राह ना देखे

नैन बिछाये ना कोई

दर्द से तेरे कोई ना तड़पा


आंख किसी की ना रोई

कहे किसको तू मेरा मुसाफिर जायेगा कहां ।। वहां कौन है तेरा ।।

कहते हैं ज्ञानी, दुनिया है फ़ानी

पानी पे लिखी लिखाई

है सबकी देखी, है सबकी जानी


हाथ किसी के ना आई

कुछ तेरा ना मेरा, मुसाफिर जायेगा कहां ।। वहां कौन है तेरा ।।


शैलेन्‍द्र का गीत है । अपनी गहनता और वेदना में इस गीत का कोई सानी नहीं है । मेरी इस गीत की पसंदीदा पंक्तियां ये वाली हैं ---

कहते हैं ज्ञानी, दुनिया है फ़ानी

पानी पे लिखी लिखाई

है सबकी देखी, है सबकी जानी


हाथ किसी के ना आई ।।

सचिन दा की आवाज़ मुझे किसी फ़क़ीर की सी आवाज़ लगती है । किसी संत या सन्‍यासी की आवाज़ । उनकी आवाज़ में कुछ और गीत मैं जल्‍दी ही लेकर आऊंगा इस लेख के दूसरे भाग में ।

फिलहाल आपकी राय का इंतज़ार ।।

14 comments:

Anonymous,  May 29, 2007 at 11:52 AM  

Agli baar in do geeton ko zaroor shaamil keejeeye

Sun mere bandhu re
sun mere mitavaa
sun mere saathi re

2. O re majhi
mere saajan hai oos paar

Annapurna

dhurvirodhi May 29, 2007 at 1:06 PM  

वाह यूनुस भाई

Ojha May 29, 2007 at 3:31 PM  

waah! ye to mere pasand ke geet hain.

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey May 29, 2007 at 4:22 PM  

गीत तो सशक्त हैं ही, आवाज तो कालजयी है. वह सुनाने का धन्यवाद. फिर आज के मिक्स/रीमिक्स/फिक्स के जमाने में प्यूरिटी की बात करने वाले को तो याद रखा ही जायेगा यूनुस जी!

Sagar Chand Nahar May 29, 2007 at 5:46 PM  

बहुत सुन्दर यूनूस भाई।
मैएन एक गाना बताया आपने तो और भी अच्छे गाने सुनवा दिये। धन्यवाद

Vikas May 29, 2007 at 8:46 PM  

Yunusbhai,
Sachinda's voice was like uncut diamond. So pure, like flowing water of a stream. Panchamda also used his father's voice in Amar Prem (Doli me bithaike kahar, Laye mohe sajana ke dwar.) Has Sachinda used his son's voice in any of his songs?
Vikas

yunus May 29, 2007 at 10:07 PM  

विकास भाई और अन्‍नपूर्णा जी अभी मुझे सचिन दा के बारे में आगे भी लिखना है और इन गानों पर चर्चा करूंगा ही । अभी तक मेरी जो जानकारी है उसके मुताबिक़ सचिन दा ने कभी पंचम से नहीं गवाया, फिर भी मैं इस बारे में खोज करूंगा ।

yunus May 29, 2007 at 10:07 PM  

बाकी सारे मित्रों को धन्‍यवाद

Anonymous,  May 30, 2007 at 2:11 AM  

Yunus ji...Burman Dada se sambhadit post ke liye haardik dhanyavaad. Do sites hain, shayad unke baare mein maaloom ho aapko:

http://sdburman.net/

Dada ki janmshati par ye site astitva main aayee

http://sdburman.com/

Dono par bahut kuch saamgri hain Dada se sambandhit...dekhiyega.

Meri nazar mein Dada was among the greatest musicians ever to grace the Indian cinema...unke madhur sangeet ko koi aur nahin chhoo paayaa...unke geeton ko sunana apne aap mein ek out-of-the-world experience hai...:).

Ek guzarish hai...ki agar aap Dada ke geeton ke videos shaamil kare...vishkar filmein jaise 'Suajata', 'Bandini', 'Aaraadhnaa' ityaadi to bahut achcha lagega.

Waise mere paas hain kuch mp3s aur videos Dada ke agar aap apne is blog par post karna chahein to let me know.

Shubkaamnaaon sahit..:)

-Amitabh

निखिल आनन्द गिरि / सोहैल आज़म May 30, 2007 at 2:59 AM  

"Dhwani tarango ki taal par aap hain vividh bharti ke sang..mai hu aapka dost yunus khan.."
ahobhagya mere jo aaj blog ki duniya mein aap mil gaye....vividh bharti aur kuch saalon se aapka niyamit shrota raha hu.....(dilli aane se pahle tak.....)..jay ho internet ki......ab lagaatar aapko pareshan karunga.....abhi dilli se M.A. in mass com.(jamia) kar raha hu..radio mera passion raha hai...aapke margdarshan ka shubhaakaankshi..
nikhil anand giri
memoriesalive@rediffmail.com
+919868062333
jarur dekhein:
www.bura-bhala.blogspot.com
www.swar-samvedna.blogspot.com

PIYUSH MEHTA-SURAT June 30, 2007 at 9:18 PM  

aadaraniy shree yunusji aur pathakgan namaskaar, sachinda ka pahela lekh main chuk gaya, is liye agar koi baat ka mujase phirse likhana ho jay to kshama kijiye. Is bar main sachinda ke naye gaayako ko badhava dene ki baat karataa hun. gayak shree manna de ka sabase pahelaa aam logo men bahot jaana pahachana hua gaana film MASHAL ka upar gagan vishal aur manna da ka he isi film ka ek aur gaana DUNIYA BKE LOGO LO HIMMAT SE KAM sachinda ki den hai. Geeta Dutt ko film DO BHAAI ke geen Mera sundar sapana bit gaya se mili khyaati aur soharat bhee Sachinda ki den hai. Film Taxi Driver ke geet Jiyo jine do se Aashaji ko sabase pahela is prakaar ki gayan shaili pradan ki, jo baadame O. P. Naiyar aur Aashaji ka sanyugt swaroop ban gayee. Is douran film Bandinime Ab ke Baras ... geet Ashaji se gavakar Ashaji ki bahumukhi pratibhako nyay diyaa. Aur unki ek anmol shodh sv. kishor kumar ki rahi, aur kuchh logo ki shodh ke mutabik 1946 me Aanth Din film men Kishorji se sabase pahela gaanaa unhone gavaya jo milta nahin hai. doosare sangeet karon ne jab kishorda ko upekshit kiya ( jisme sabase pahelaa no. badkismatise Noushadsahab ka raha tab Barmanda aur Devanand sahabne Kishorji ko is gayako ki Dooniyame saMbhal ke Rakha, is liye ye dono kabile tarif hai, aur Film Aaradhnase Barmandane he Kishorjika Fily Gayakon ki duniyame kishorji ka punarjanam karvaya. Is tarah gayako ki pratibha ko pahachanne aur badhanemen Sachinda ka koee javab nahin hai.

PIYUSH MEHTA-SURAT

Bheem September 8, 2007 at 9:04 AM  

thanks yunus for such a beautiful post on dada. you have eloborated his fines details in so simpler way as dada used to do.
I was just searching references for sdburman.com, fortunately I connected to you.
you have written about sdburman.com that it is came in exixtance on dada's birth anniversary, true it is on sdburman.com domain from this prestigious moment, but it was in existance since 2001 on anoter domain www.sdburman.8m.com we have just shifted it to appropriate domain.

it still under development phase, wait for more thrilling informations on dada with additional features.
drom mail me on bheemsinh@hotmail.com

Jeeban Mishra February 26, 2011 at 9:17 PM  

Sir,

What you said, we all love that for long since. Recently I got one song of him of the film -eight day-, babu re dil ko bachana. This is a wonder romantic songs of Sachinda de great.

Jeeban Mishra
9974552054
Mood : ROMANCE Theme : SAD Tempo : MEDIUM SLOW
Startcast : ASHOK KUMAR / VEERA / RAMA SHUKUL / LEELA MISHRA Director : DATTARAM N PAI Copyright : Saregama

M Husain Panja July 16, 2011 at 1:03 PM  

Yunus Bhai,
Assalam Alaykum,
Daan Singh ka Songs Sune Maza Aagaya Mere Pas Ek Hi Geet Tha Mere Humnasheen Magar Ab Mukesh Ke Do Songs Mila Kar Teen Hogaye Hum Indore Main Mile Hain Ajatshtru Ne Aap Ka Sanman Jab Kiya Tha Prem Chhabarwalji Ne Milaya Tha Premji Mere Bahoot Achhe Dost Hai Maine Aap Ko Ek CD Bhi Dithi

M Husain Panja
Indore
09425082543

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http://www.google.com/transliterate/indic/

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