राजा मेहदी अली खां की याद में आईये आज सुनें उनके गाने
मुझे राजा मेहदी अली ख़ां के गाने बहुत पसंद हैं । ख़ासकर मदन मोहन के साथ उनकी जोड़ी ने जो काम किया है वो कालजयी है । कहते हैं कि मेहदी साहब नवाबों के ख़ानदान के थे । उनके निजी जीवन के बारे में ना तो कुछ ज्यादा लिखा गया है और ना ही मुझे पता चल पाया । अफ़सोस कि हमारे यहां इतने नामचीन गीतकारों की गुमनामी को दूर करने का कभी किसी ने सोचा ही नहीं । मुझे बहुत खोजने पर भी ना तो राजा मेहदी अली खां की जीवनी मिली और ना ही उनका कोई चित्र मिला ।
धुंधली सी याद उस पुस्तक की जरूर आ रही है जिसे शायद प्रकाश पंडित ने कंपाईल किया था और
जिसमें राजा मेहदी अली ख़ां की उर्दू शायरी से परिचय कराया गया था । मुझे ये भी पता है कि उर्दू में मेहदी साहब एक मज़ाहिया शायर के रूप में ज्यादा जाने जाते थे लेकिन फिल्म संसार में उन्होंने बहुत गंभीर काम किया है । उनके गानों में विविधता है । नाज़ुकी है और सरलता है । ये तीनों चीज़ें फिल्मी दुनिया में कामयाबी की बुनियाद होती हैं । फिलहाल ये गीत सुनिए-फिल्म है वो कौन थी । संगीत मदनमोहन का है और आवाज़ लता मंगेशकर की ।
मुझे ये क्रांतिकारी गीत लगता है । देखिए कितने अलग तरीक़े से मेहबूबा बेवफ़ाई पर शोले उगल रही है ।
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जो हमने दास्तां अपनी सुनाई आप क्यूं रोए
तबाही तो हमारे दिल पे आई आप क्यूं रोए
हमारा दर्दे ग़म है ये, इसे क्यों आप सहते हैं
ये क्यों आंसू हमारे आपकी आंखों से बहते हैं
ग़मों की आग हमने खुद लगाई आप क्यूं रोए
बहुत रोए मगर अब आपकी ख़ातिर ना रोएंगे
ना अपना चैन खोकर आपका हम चैन खोऐंगे
क़यामत आपके अश्कों ने ढायी आप क्यूं रोए
ना ये आंसू रूके तो देखिए हम भी रो देंगे
हम अपने आंसूओं में चांद तारों को डुबो देंगे
फ़ना हो जाएगी सारी ख़ुदाई आप क्यूं रोए ।।
राजा मेहदी अली ख़ां की पुण्यतिथि है आज । हम उनको नमन करते हैं ।
उनके गानों पर एक लंबी चर्चा की इच्छा है, देखिए कब मोहलत मिलती है इस लंबे काम के लिए ।
आज धीनगाना प्लेयर पर मैंने राजा मेहदी अली खां के गीत चढ़ाए हैं । अगर आप इन्हें लगातार सुनें तो आपका ये दिन यादगार बन जायेगा, संवर जायेगा, निखर जाएगा ।
धीनगाना प्लेयर मेरे चिट्ठे पर बाईं ओर ऊपर है ।
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