संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।
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Saturday, July 31, 2010

घोड़ा पिशौरी मेरा--रफ़ी साहब का एक यादगार तांगा-गीत


31 जुलाई मोहम्‍मद रफी की याद का दिन होता है । ज़ा‍हिर है कि इस दिन रेडियो से आपको दिन भर रफ़ी साहब के गाए गाने सुनाए देते हैं। यूं तो हर दिन रफ़ी साहब का है। उनके बिना कोई रेडियो-स्‍टेशन, टी.वी.चैनल, कोई आई.पॉड, कोई म्‍यूजिक-प्‍लेयर नहीं चलता। 

रेडियोवाणी पर हमारा प्रयास यही रहता है कि लोकप्रिय और प्रचलित रचनाओं से इतर rafi and aliकुछ नया, अनसुना और अलग सुनवाया जाए। रफ़ी साहब का एक ऐसा गाना आज हम आपके लिए 'रेडियोवाणी' पर लेकर आये हैं जो सुनने, देखने और पढ़ने तीनों में आपको अद्भुत लगेगा। और ज्‍यादा सुनाई भी नहीं देता ये गाना। बाईं ओर जो तस्‍वीर आप देख रहे हैं उसमें मोहम्‍मद रफ़ी और जाने-माने मुक्‍केबाज़ मोहम्‍मद अली एक दूसरे पर मुक्‍के ताने नज़र आ रहे हैं। तस्‍वीर फ्लिकर के इस यूज़र-अकाउंट से साभार है।

सन 1963 में नरेश सहगल की फिल्‍म आई थी--'प्‍यार का बंधन'। कलाकार थे राजकुमार, निशी, नाज़, जॉनी वॉकर, हेलेन वग़ैरह। इस फिल्‍म के गाने नक्‍श लायलपुरी ने लिखे थे और संगीतकार थे रवि।  दिलचस्‍प बात ये है कि इस फिल्‍म के जिस गाने का आज जिक्र है--उसमें फिल्‍म के हीरो राजकुमार शानदार अंदाज़ में तांगा चला रहे हैं। तांगे वालों के गीत सिनेमा में और भी आए हैं। 'नया दौर' को याद करें जिसमें दिलीप साहब खांटी तांगा-वाले लगे थे। यहां राजकुमार भी खांटी तांगावाले ही लग रहे हैं। इस गाने में रफ़ी साहब के गाने का पंजाबी टोन बड़ा ख़ूबसूरत लगता है। अफ़सोस कि अब फिल्‍मों में ऐसे गानों की गुंजाईश नहीं रही।

एक ज़माने में अनगिनत ऐसे गीत आए जिनमें 'तांगा-रिदम' था। और कुछ गीत तो ऐसे हैं जो तांगा-रिदम के बावजूद फिल्‍माए तांगे पर नहीं गए हैं । तांगा-गीतों पर मैंने 'भास्कर' में यहां एक लेख लिखा है। वैसे रफ़ी साहब के बारे में एक दिलचस्प बात ये है कि उन्‍होंने जिंदगी के कुछ ज़रूरी काम करने वाले मेहनती लोगों के कई गाने गाए। छोटी-सी फेहरिस्‍त--

मैं एक रिक्‍शा-वाला (फिल्‍म छोटी बहन) रिक्‍शा वाले का गीत
मूलीराम और भिंडीमल (फिल्‍म दुल्‍हन) सब्‍ज़ी वाले का गीत
बरतन क़लई करा लो (फिल्‍म गर्ल्स हॉस्टल) बर्तन क़लई कराने वाले का गीत
मालिश तेल मालिश (प्‍यासा) चंपी-वाले का गीत
ले लो चूडियां (घर की लाज) चूड़ी वाले का गीत 

तो आईये आज रफ़ी साहब की पुण्‍यतिथि वाले दिन रफ़ी का ये अलबेला गाना सुनें। 
 

यहां सुनिए।

song:ghoda pishori mera
singer:: mohd rafi
lyrics: naksh layalpuri  sahir ludhiyanvi
music:ravi
film: pyar la bandhan
year: 1963



घोड़ा पिशौरी मेरा, तांगा लाहौरी मेरा,
बैठो मियांजी बैठो लाला मैं हूं अलबेला तांगे वाला। 
टांगें थकेंगी यारो, टांगे में आओ 
गर्मी बड़ी है यारो पैदल ना जाओ
होगा गुलाबी रंग काला, गुलाबी रंग काला
मैं हूं अलबेला तांगेवाला।
बचना ओ जाने वाले मैं तुझपे वारी
टकरा ना जाए कहीं शाही सवारी
रोता फिरेगा घर वाला
मैं हूं अलबेला तांगेवाला।
मेहनत मजूरी करूं, झुकना ना जानूं
आंधी तूफान में भी रूकना ना जानूं
अपना साईं है रखवाला, साईं है रखवाला
मैं हूं अलबेला तांगेवाला। 

यहां देखिए ।



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