संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।
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Monday, May 25, 2009

एक जंगल है तेरी आंखों में: दुष्‍यंत कुमार की ग़ज़ल-मीनू पुरूषोत्‍तम की आवाज़ ।

पिछले दिनों मनीष ने अपने ब्‍लॉग पर 'दुष्‍यंत कुमार' की याद दिला दी ।
और वो स्‍कूल-कॉलेजिया दिन याद आ गये जब मध्‍यप्रदेश के छोटे-से शहर सागर के दो पुस्‍तक भंडारों से दुष्‍यंत की 'साये में धूप' अकसर ख़रीदी जाती थी । होता ये था कि जो भी मित्र देखता वो इसे 'उठा' ले जाता । और हम फिर से 'वेरायटी' या 'साथी बुक डिपो' जाकर फिर से 'साये में धूप' ख़रीद लेते । ये वो दिन थे जब 'वाद-विवाद' प्रतियोगिताओं में हिस्‍सा लेने का शौक़ परवान चढ़ रहा था । और ऐसे 'अशआर' की ज़रूरत महसूस होती थी, जिससे विरोधी-पक्ष को धराशाई किया जा सके । 'साए में धूप' ने ये काम बहुत आसानी से किया ।


'साए में धूप' पढ़कर ही हमने दुष्‍यंत कुमार को जाना-पहचाना । मध्‍यप्रदेश में होने की वजह से दुष्‍यंत की मित्र-मंडली के काफी साहित्‍यकारों को भी पहचाना । उनके संस्‍मरणों के ज़रिए भी दुष्‍यंत की शख्सियत से परिचित हुए । उनकी दूसरी पुस्‍तक 'आवाज़ों के घेरे' भी खोजकर पढ़ी । पर जो बात 'साए में धूप' में है...वो दुष्‍यंत की दूसरी रचनाओं में नहीं । 'कविता-कोश' में आप 'साए में धूप' यहां पढ़ सकते हैं ।


दुष्‍यंत की शायरी का 'उपयोग' पिछले दिनों एक फिल्‍म में किया गया था । हो सकता है कि 'रेडियोवाणी' पर हम उनमें से कुछ गीत भी आपके लिए लेकर आएं । लेकिन फिलहाल तो मीनू पुरूषोत्‍तम की आवाज़ में आपके लिए दुष्‍यंत की वो ग़ज़ल लेकर आया हूं जो अपनी संवेदनशीलता और अपने रूपकों में बड़ी ही नायाब है ।



एक जंगल है तेरी आंखों में
मैं जहां राह भूल जाता हूं ।
मैं तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने क़रीब पाता हूं ।
तू किसी रेल-सी गुज़रती है,
मैं किसी पुल-सा थरथराता हूं ।
हर तरफ एतराज़ होता है
मैं अगर रोशनी में आता हूं ।
एक बाज़ू उखड़ गया जबसे
और ज़्यादा वज़न उठाता हूं ।
एक जंगल है तेरी आंखों में ।।








मीनू पुरूषोत्‍तम ने कुछ मशहूर फिल्‍मी-गीत भी गाए हैं । जैसे मोहम्‍मद रफी के साथ 'चायना-टाउन' का गीत 'बार बार देखो' । और फिल्‍म 'दाग़' का गीत-'नी मैं यार मनाणा नी' । दुष्‍यंत की ये ग़ज़ल मीनू पुरूषोत्‍तम के ग़ज़लों के एक अलबम से ली गयी है । सुना है कि आजकल मीनू पुरूषोत्‍तम ह्यूसटन में रहती हैं और नई पीढ़ी को संगीत भी सिखाती हैं । कोई इस बात की पुष्टि करेगा ?

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