संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।

Tuesday, August 4, 2009

'ओ हंसिनी' 'गोरी ओ गोरी' और 'फटाफट'--बमचिक किशोर दा की जै हो


किशोर कुमार के अनगिनत किस्‍से सुने हैं उनके परिवार वालों और मित्रों से । कई बरस पहले 'यूनियन पार्क' चेम्‍बूर में दाद‍ामुनि अशोक कुमार से मिलने का मौक़ा मिला था । लगभग एक पूरा दिन उनके साथ बिताया । जो किस्‍से दादामुनि ने सुनाए उनमें किशोर दा के भी किस्‍से थे । उन्‍होंने बताया था कि बचपन में किशोर कुमार बड़े कर्कश आवाज़ वाले थे । एक दिन उनकी मां 'गौरी' हंसिये से सब्‍ज़ी काट रही थीं कि तभी किशोर बाहर से शरारत करते हुए आए और उनका पैर हंसिए पर पड़ गया । तीन दिन तक किशोर रोते रहे । उसके बाद उनकी आवाज़ खुल भी गई और सुरीली भी बन गयी । 

एक्टिंग वो करना नहीं चाहते थे ।  ज़बर्दस्‍ती एक्‍टर बनाए गए तो सबको तंग किया ।

इसी तरह जाने-माने निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने बताया था कि अपनी पहली ही निर्देशित फिल्‍म ‘मुसाफिर’ के दौरान किशोर कुमार ने उन्‍हें बहुत तंग किया था । ऋषि दा पहली बार निर्देशन कर रहे थे, नये निर्देशक में एक तरह की घबराहट होती ही है । लेकिन किशोर थे कि कभी स्क्रिप्‍ट का पालन नहीं करते थे । हमेशा इम्‍प्रोवाइज़ कर लेते थे । अगर ज़ोर देकर कहा जाता कि ऐसा ही करो । तो इतनी बुरी एक्टिंग करते थे कि आप सिर पकड़कर बैठ जाएं या फिर हाथ जोड़कर कहें कि महाराज जैसा मन में आए करो ।

‘मुसाफिर’ की शूटिंग का आखिरी दिन था । किशोर का सेट पर इंतज़ार किया जा रहा था । पर किशोर थे कि आए ही नहीं । हार कर ऋषिकेश मुखर्जी ने उनके घर पर फ़ोन किया । किशोर कुमार की पत्‍नी ने फ़ोन उठाया और कहा कि आप खुद आकर देख लीजिये यहां क्‍या हाल हुआ है । ऋषि दा भागे भागे पहुंचे कि माजरा क्‍या है । पहुंचे तो किशोर दरवाज़ा बंद करके भीतर से चिल्‍ला रहे थे, मत आईये, मत आईये । ख़ैर किसी तरह किशोर को सामने बुलवाया गया—तो पता चला कि उन्‍होंने अपना सिर मुंडवा लिया था । उन दिनों वो मिस मेरी फिल्‍म की शूटिंग कर रहे थे । निर्माता-निर्देशक से झगड़ा हुआ तो विरोध स्‍वरूप सिर मुंडवा लिया और कहा लो अब कर लो शूटिंग । इन लड़ाई में फंस गए ऋषि दा ने विग तैयार करवाया और अपनी फिल्‍म पूरी की ।

ऐसे किशोर दा भीतर से बेहद संजीदा थे । अपने आखिरी दिनों में वो खंडवा लौटना चाहते
थे । पर समय ने उन्‍हें इसकी इजाज़त नहीं थीं । आईये किशोर दा के दो अलबेले गाने सुनें और एक अलबेला गाना देखें ।

इस पहले गीत का इंट्रो म्‍यूजिक तकरीबन पौने दो मिनिट का है । जिसमें सेक्‍सोफोन की तरंगें भी शामिल हैं ।
song: o hansini
film:zehreela insaan
lyrics:majrooh sultanpuri
music: R D burman
duration: 05:06 




ओ हंसिनी मेरी हंसिनी
कहां उड़ चली, मेरे अरमानों के पंख लगाके
आजा मेरी सांसों में महक रहा रे तेरा गजरा
आजा मेरी रातों में लहक रहा रे तेरा कजरा
ओ हंसिनी ।।
देर से लहरों में कमल संभाले हुए मन का
जीवन ताल में भटक रहा रे तेरा हंसा




ओ हंसिनी ।।

इस दूसरे गाने में किशोर दा ने पुरूष और महिला दोनों स्‍वरों में गाया है । ऐसे दूसरे गाने तो आपको पता ही हैं ना । 'हाफ टिकिट' का 'आके सीधी लगी' और 'लड़का-लड़की' का 'सुणिए सुणिए' ।
song: gori o gori
film: pyar ki kahani
lyrics:anand bakshi
music: R D Burman
duradion: 3:14



इसके बाद ये गाना देखिए । फिल्‍म है 'मैं सुंदर हूं' । इस गाने में आपको शंकर-जयकिशन की जोड़ी के शंकर, गीतकार आनंद बख्‍शी, क्‍लेरिनेट बजाते मनोहारी सिंह, रिकॉर्डिस्‍ट मीनू कात्रक, शंकर जयकिशन के सहायक (जिनके नामों से उनके चेहरे मिलाने की जुगत जारी है
) नज़र आएंगे । किशोर दा का जन्‍मदिन सबको मुबारक ।


8 comments:

वही,  August 4, 2009 at 11:15 AM  

अब हम क्या कहें ; आप ही बताइये !
;-)

वही,  August 4, 2009 at 11:20 AM  

हाँ,इतना बताए बिना ज़रूर नहीं रह सकते कि महमूद जी के साथ ज़ोरदार, "फटाफट" डान्स किया है - किशोर कुमार की पत्नी लीना चन्दावरकर ने !

बी एस पाबला August 4, 2009 at 11:26 AM  

फटाफट गीत बरसों बाद देख कर बमचिक हो गई जी!

परमजीत बाली August 4, 2009 at 3:24 PM  

बढिया पोस्ट लिखी है...आभार।

Chidambar August 4, 2009 at 5:20 PM  

फटा फट गीत में दिखाई दॆनॆवालॆ जयकिशन हैं, शंकर नहीं ।

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