संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।

Thursday, June 21, 2007

विश्‍व संगीत दिवस पर सुनिए मेरा पहला ऑडियो फ़ीचर


आज विश्‍व संगीत दिवस है ।

विकीपीडिया पर खोजा तो पता चला कि इसे मनाने की प्रथा सन 1982 से चली आ रही है । पिछले कुछ दिनों से हिंदी ब्‍लॉगिंग की हमारी छोटी-सी दुनिया में जिस तरह का तूफ़ान मचा था, उसमें विश्‍व संगीत दिवस का ज़िक्र और मौज़ूं हो जाता है ।

भाषा और विचारों की वजह से तो फिर भी बवाल उठते रहे हैं पर इतिहास गवाह है कि संगीत की वजह से कभी कोई फ़साद नहीं हुआ । संगीत ने कभी लोगों को तोड़ा नहीं । संगीत ने कभी संगीन का रूप नहीं लिया ।

संगीत के लिए सरहदों की मजबूरियां कभी नहीं रहीं । संगीत के लिए सलाख़ों की ज़ुल्‍मतें कभी कारगर नहीं बनीं । मजरूह सुलतानपुरी का मेरा प्रिय शेर याद आ रहा है—

रोक सकता हमें ज़िन्‍दाने बला क्‍या मजरूह,
हम तो आवाज़ हैं दीवारों से छन जाते हैं ।।

आज मुझे ज्‍यादा कुछ लिखना नहीं है, क्‍योंकि आज से मैं अपने चिट्ठे पर बोलना शुरू कर रहा हूं, ज्‍यादातर तो लिखा ही करूंगा, कभी कभी बोला भी करूंगा । तो सुनिए ‘विश्‍व संगीत दिवस’ पर मेरी ये विशेष पेशक़श--


और हां, बहुत दिनों से लावण्‍या जी और अन्‍य मित्रगण अपनी आवाज़ सुनवाने का अनुरोध कर रहे थे । विविध भारती के पितृपुरूष पं. नरेंद्र शर्मा की सुपुत्री लावण्‍या जी अमेरिका में हैं और वहां तक रेडियो के ज़रिए मेरी आवाज़ शायद नहीं पहुंच सकती । ऐसे तो पहुंच ही सकती है ।

ज़रूर बताईये कि विश्‍व संगीत दिवस के बारे में और इस प्रस्‍तुति के बारे में आपका क्‍या कहना है ।
सबको विश्‍व संगीत दिवस की शुभकामनाएं ।

रेडियोवाणी पर संगीत का ये कारवां जारी रहेगा ।

22 comments:

Neeraj Rohilla June 21, 2007 at 8:53 AM  

यूनुसजी,

लीजिये खास आपके लिये कहकशाँ के गीतों की कडियाँ,

http://nrohilla.multiply.com/music/item/1

and,

http://nrohilla.multiply.com/music/item/12

अभी कुछ गाने और बाकी हैं जिन्हे मैं जल्द ही आपकी सेवा में भेज दूँगा ।

साभार,

काकेश June 21, 2007 at 9:10 AM  

खूबसूरत प्रस्तुति.. जारी रहे ये सफर ..
संगीत दिवस की आप को भी शुभकामनाऎं..

अभिनव June 21, 2007 at 9:41 AM  

भाई वाह यूनुसजी आपकी आवाज़ सुनकर अमीन सयानी जी की याद आ गई। बहुत बढ़िया प्रस्तुति रही हमारी शुभकामनाएँ स्वीकारें।

Vikas June 21, 2007 at 10:32 AM  

युनूसभाई,
आपने अपने आपको इंटरनेटकी इस नयी और अत्याधुनिक तकनीक से जिस तरह अपडेट किया है, वो वाकई काबिले तारीफ है. आज आपकी लिखाई की जगह आपकी आवाज सुनकर बडा मजा आया. इन दिनो हमारे यहां चालीसगांवमें विविध भारती न जाने क्यूं बिलकुल साफ सुनाई नहीं दे रही है (रेडिओ पर). इससिये मै आपकी आवाज सुननेसे वंचित रह गया था. वो कमी आज आपने पूरी कर दी. धन्यवाद.

Vikas June 21, 2007 at 10:33 AM  

Can you give me your personal e mail address?

Shirish June 21, 2007 at 10:56 AM  

Wah Yunus,
Dil khush ho gaya! Wish you had made it longer, with voices of more maestros.

Raviratlami June 21, 2007 at 11:10 AM  

बहुत ही शानदार प्रस्तुति. लाजवाब, पूरी तरह पेशेवराना. जानकारी और मनोरंजन का संगम.

धन्यवाद.

विविधभारती को डीटीएच तथा डिशटीवी के माध्यम से दूर-दराज व विदेशों में भी सुना जा सकता है और वह भी सीडी क्वालिटी साउंड में. मैं इसी जरिए से विविध भारती सुनता हूँ.

Anonymous,  June 21, 2007 at 11:29 AM  

Mujhe tho Vividh Bharati par aapki Aawaz sunane ki aadat hai.

Geeton ki prastuti tho shaandaar hoti hi hai. Mujhe khushi hai ki Phone-in-programme Manthan main bhag le kar maine phone par vibhinn vishayon par aapse baat ki.

Aapke blog ke madhyam se main abhinetri Anita Guha ko shradhanjali dena chahti hun. Anita Guha ki maine do filme dekhi - Jai santoshi Maa aur Dekh Kabira roya.

Yeh dono hi filme musical hit rahi. Dono hi filmo ke geet bahut hi lokpriy huye aur Ittefaq se aaj Vishwa Sangeet divas ki din hi Anita Guha ke nidhan ka samachaar mila.

Is Mahaan kalakaar ko shat shat naman.

Annapurna

Suresh Chiplunkar June 21, 2007 at 12:15 PM  

बेहतरीन प्रस्तुति यूनुस भाई,
आपके हाथ में अब रेडियो और इंटरनेट दोनों हैं और हमें हमेशा आपसे मधुर प्रस्तुति की आशा रहेगी... आपसे बहुत कुछ सुनने-गुनने-सीखने को मिलेगा... बधाईयाँ स्वीकार करें..

RC Mishra June 21, 2007 at 1:08 PM  

यूनुस जी आज लगा एक बार फ़िर से रेडियो (विविध भारती, आकाशवाणी का पञ्चरंगी कार्यक्रम) से जुड़ गया । आपकी आवाज तो लाजवाब है। आज कई सालों बाद सुन रहा हूँ।

sajeev sarathie June 21, 2007 at 7:14 PM  

आपकी आवाज़ तो नही सुन पाया मगर प्रस्तुती लाजवाब है .... संगीत दिवस की शुभकामनायें .... आपने जो मेरे पोस्ट पर लिखा वो मैं हमेशा याद रखूंगा

सिंधु श्रीधरन,  June 21, 2007 at 11:54 PM  

यूनुस भैया,

दिल ख़ुशी से झूम उठा! बहुत सुंदर प्रस्तुती है, बहुत शुक्रिया। लगे रहिए।
आपको भी विश्व संगीत दिवस की शुभकामनाएं।

vimal verma June 22, 2007 at 1:51 PM  

आपका ये तरीका भी अच्छा लगा. प्रस्तुति भी अच्छी लगी .आवाज़ भी दमदार है आपकी, सुनाते रहे..

Lavanyam -Antarman June 22, 2007 at 10:01 PM  

यूनुस नमस्ते !
आपकी आवाज़ को सुनवाने के मेरे अनुरोध को पूरा करवाने पर और आपकी सर्वथा सधी हुई, सुननेवाले के मन मेँ शाँति का सँचार करती, मधुर आवाज़ को सुनकर बहुत ही प्रसन्नता का अनुभव हुआ !
आप को कितने बरस हो गये रेडियो प्रसारण करते हुए?
और जो गीतोँ का गुल्दस्ता आपने चुनिँदा वाक्योँ के साथ परोसा उसे सुनकर मन प्रसन्न हुआ --

सँगीत दिवस अवश्य मनाया जाना चाहीये. सच कहा आपने कि "सँगीत" ही हर तबक्के के इन्सानोँ को जोडने की शक्ति रखता है --

जिस तरह अमीन सयानी जी, हरीश भिमाणी जी इत्यादी ने अपनी आवाज़ से, अपनी जगह
कायम की है (मीडीया मेँ ) आप की जगह भविष्य के लिये सुरक्षित रहेगी इस बात पर मुझे
पूरा यकीँ हो गया -- :)
आपको मेरे शुभ आषिश !!
हम सभी के दुलारे पापा जी स्व. पँडित नरेन्द्र शर्मा के कार्य को आपने जो इज्जत दी है उसके लिये मेरा ह्रदय कृतज्ञता से भर गया !
उसके लिये भी धन्यवाद.
खुश रहिये ...जीते रहिये ..
सादर स-स्नेह,
लावण्या

Lavanyam -Antarman June 23, 2007 at 4:35 AM  

यूनुस भाई

नमस्ते !
ये कहना चाहती थी -- कृपया मेरी पोस्ट को इस तरह से देखियेगा-
-- लावण्या

yunus June 23, 2007 at 5:37 PM  

नीरज जी बहुत बहुत शुक्रिया कहकशां की लिंक देने का । आपका हृदय से आभारी हूं ।


काकेश जी, अभिनव और शिरीष जी, विकास जी आपका शुक्रिया ।
विकास जी मेरा ईमेल आई.डी. मेरे ब्‍लॉग के प्रोफाइल में अंकित है । आप उस पर मेल कर सकते हैं । चालीसगांव में आप किस बैन्‍ड पर सुनते हैं, ये जानकर ही पता लगेगा कि वहां प्रसारण सही क्‍यों नहीं आ रहा है ।

वैसे रवि भाई ने सही कहा है कि डी.टी.एच. के ज़रिए विविध भारती देश विदेश में उपलब्‍ध है । विकास जी आप चाहें तो ये सुविधा ले सकते हैं ।

अन्‍नपूर्णा जी मैंने अनीता गुहा पर अलग से लिख दिया है ।

सुरेश भाई और सजीव आपका भी शुक्रिया ।

मिश्रा जी दूर देस में भी विविध भारती का अहसास आपको कैसा लगा हो, ये मैं समझ सकता हूं ।


उन्‍मुक्‍त, सिंधु श्रीधरन और विमल वर्मा जी आपका भी शुक्रिया ।
सिंधु जी आपने मेरा ब्‍लॉग कैसे खोजा ये ज़रूर बताईयेगा, मेरे लिए ये जानना दिलचस्‍प होगा ।


लावण्‍या जी बहुत बहुत धन्‍यवाद आपके आशीष के लिए ।
मुझे तो ये सोच सोच कर ही सुकून मिलता है कि आप पंडित नरेंद्र शर्मा की सुपुत्री हैं, आपने उन्‍हें बोलते, लिखते, उठते बैठते सोचते देखा है । आपने पूछा है तो बता दूं कि मैं सन 1996 से विविध भारती में हूं । वैसे रेडियो प्रसारण करते हुए मुझे लगभग सत्रह साल हो गये हैं । कॉलेज के दिनों से कर रहा हूं ।

yunus June 23, 2007 at 5:37 PM  

नीरज जी बहुत बहुत शुक्रिया कहकशां की लिंक देने का । आपका हृदय से आभारी हूं ।


काकेश जी, अभिनव और शिरीष जी, विकास जी आपका शुक्रिया ।
विकास जी मेरा ईमेल आई.डी. मेरे ब्‍लॉग के प्रोफाइल में अंकित है । आप उस पर मेल कर सकते हैं । चालीसगांव में आप किस बैन्‍ड पर सुनते हैं, ये जानकर ही पता लगेगा कि वहां प्रसारण सही क्‍यों नहीं आ रहा है ।

वैसे रवि भाई ने सही कहा है कि डी.टी.एच. के ज़रिए विविध भारती देश विदेश में उपलब्‍ध है । विकास जी आप चाहें तो ये सुविधा ले सकते हैं ।

अन्‍नपूर्णा जी मैंने अनीता गुहा पर अलग से लिख दिया है ।

सुरेश भाई और सजीव आपका भी शुक्रिया ।

मिश्रा जी दूर देस में भी विविध भारती का अहसास आपको कैसा लगा हो, ये मैं समझ सकता हूं ।


उन्‍मुक्‍त, सिंधु श्रीधरन और विमल वर्मा जी आपका भी शुक्रिया ।
सिंधु जी आपने मेरा ब्‍लॉग कैसे खोजा ये ज़रूर बताईयेगा, मेरे लिए ये जानना दिलचस्‍प होगा ।


लावण्‍या जी बहुत बहुत धन्‍यवाद आपके आशीष के लिए ।
मुझे तो ये सोच सोच कर ही सुकून मिलता है कि आप पंडित नरेंद्र शर्मा की सुपुत्री हैं, आपने उन्‍हें बोलते, लिखते, उठते बैठते सोचते देखा है । आपने पूछा है तो बता दूं कि मैं सन 1996 से विविध भारती में हूं । वैसे रेडियो प्रसारण करते हुए मुझे लगभग सत्रह साल हो गये हैं । कॉलेज के दिनों से कर रहा हूं ।

yunus June 23, 2007 at 5:37 PM  

नीरज जी बहुत बहुत शुक्रिया कहकशां की लिंक देने का । आपका हृदय से आभारी हूं ।


काकेश जी, अभिनव और शिरीष जी, विकास जी आपका शुक्रिया ।
विकास जी मेरा ईमेल आई.डी. मेरे ब्‍लॉग के प्रोफाइल में अंकित है । आप उस पर मेल कर सकते हैं । चालीसगांव में आप किस बैन्‍ड पर सुनते हैं, ये जानकर ही पता लगेगा कि वहां प्रसारण सही क्‍यों नहीं आ रहा है ।

वैसे रवि भाई ने सही कहा है कि डी.टी.एच. के ज़रिए विविध भारती देश विदेश में उपलब्‍ध है । विकास जी आप चाहें तो ये सुविधा ले सकते हैं ।

अन्‍नपूर्णा जी मैंने अनीता गुहा पर अलग से लिख दिया है ।

सुरेश भाई और सजीव आपका भी शुक्रिया ।

मिश्रा जी दूर देस में भी विविध भारती का अहसास आपको कैसा लगा हो, ये मैं समझ सकता हूं ।


उन्‍मुक्‍त, सिंधु श्रीधरन और विमल वर्मा जी आपका भी शुक्रिया ।
सिंधु जी आपने मेरा ब्‍लॉग कैसे खोजा ये ज़रूर बताईयेगा, मेरे लिए ये जानना दिलचस्‍प होगा ।


लावण्‍या जी बहुत बहुत धन्‍यवाद आपके आशीष के लिए ।
मुझे तो ये सोच सोच कर ही सुकून मिलता है कि आप पंडित नरेंद्र शर्मा की सुपुत्री हैं, आपने उन्‍हें बोलते, लिखते, उठते बैठते सोचते देखा है । आपने पूछा है तो बता दूं कि मैं सन 1996 से विविध भारती में हूं । वैसे रेडियो प्रसारण करते हुए मुझे लगभग सत्रह साल हो गये हैं । कॉलेज के दिनों से कर रहा हूं ।

sootradhaar June 23, 2007 at 6:58 PM  

यूनुस जी...आपकी मधुर आवाज़ इतने सालों बाद सुनी ...मज़ा आ गया ...:) और इस तकनीक का प्रयोग करने के लिए हार्दिक बधाई ! आशा है आगे भी आपकी कर्णप्रिय प्रस्तुतियों को सवर्ण करने का मौका मिलेगा...!

Abhishek June 23, 2007 at 11:40 PM  

वाह यूनुस भाई,
मजा आ गया । आपने ये पोस्ट तो ऐसे लिखी कि सुन के लगा कि विविध भारती पर कोई पसन्दीदा कार्यक्रम सुन रहे हों । वही अनोखा अन्दाज़, वही गीतों का चयन ।

कृपया अपने चिट्ठे पर ऐसे ही बोलते रहें । सुनने मे एक अलग ही मजा है जो पढ़ने मे नही ।

सधन्यवाद
अभिषेक पाण्डेय

Anonymous,  June 24, 2007 at 2:09 PM  

Priy Yunus bhai,

Aap ki blog to roz dekhta hoon, par kuch likhne ki mohlat nahin milti. Khai aaj anitaji ke bare mein blog padha, mujhe unki death ki khabar aap ke blog se mili, purane zamane ki guni abhinetriyom me se ek aur chali gayi. Aap ne Anitaji ki kai filmo ka zikr kiya,ek do gaane aur bhi hain jinka main zikra karna chaahoonga, ek to film sanjog se lata didi ka gaya 'badli se nikla hain chand' aur phir didi ke saath mukeshji ki duet 'ek manzil raahi do'. Film dekh kabira roya ke to sabhi gaane ek se badhkar hain. Aap ne sahi kaha, 'meri veena' latadidi ki career ke sabse khoobsoorat geetom me se hai, par mujhe lagta nahin ke is gaane ko utni popularity mili jitni milni chahiye thi. Ek aur lajawab gaana hai isi film main, jisko bhi zyada popularity nahin mili 'tu pyar kare ya thukraye'. Ye gana anitaji par hi filmayi gayi thi yeh mujhe pata nahin. Anitaji ne kayi serials main bhi anek yaadgar kirdar nibhaye, aur ab is duniya ke manch se parde ke peeche ki taraf chsli gsyi...unki yaad main meri shradhanjali

binoj

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