सुनिए--एकला चोलो रे और किशोर कुमार का एक बांगला गीत
पता नहीं क्यूं मुझे बांगला भाषा से बड़ा प्रेम है । इसी प्रेम के तहत कॉलेज के ज़माने में भारतीय क्षेत्रीय भाषा संस्थान से मैंने बांगला का पत्राचार कोर्स भी किया था । लिखना पढ़ना सीख ही लिया था किसी तरह । हांलांकि आज ज्यादातर भूल गया है, पर बांगला सीखकर बांगला साहित्य पढ़ने की तमन्ना अधूरी रह गयी है । शायद कभी पूरी कर सकूं ।
इसी बांगला प्रेम के तहत मैं ना केवल बांगला फिल्में खोज खोजकर देखता हूं बल्कि बांगला गीत भी सुनता हूं । मेरे पास किशोर कुमार के गाये बांगला गीतों का छोटा-मोटा संग्रह भी है । और पंकज मलिक के स्वर में महिषासुर मर्दिनी भी । शायद आप जानते हों कि पंकज मलिक ‘दुर्गापूजा’ के दिनों में कलकत्ता रेडियो से ‘महिषासुरमर्दिनी’ प्रस्तुत करते थे जिसे एच एम वी ने रिकॉर्ड और सी डी की शक्ल में बाज़ार में उतारा है ।
ख़ैर आज अचानक मुझे ‘एकला चलो रे’ मिल गया । तो आईये इसे सुनें और अकेले चलने, चलते रहने की ऊर्जा से भर-भर जाएं ।
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इस गाने के बाद अब इच्छा ये भी हो रही है कि किशोर कुमार की आवाज़ में आपको एक बांगला फिल्मी गीत सुनवा दिया जाये । ये हिंदी के एक मशहूर गाने का बांगला संस्करण है और जानबूझकर सुनवा रहा हूं ताकि भाषाई सीमाओं के बावजूद आपको इसका आनंद आ पाये । आप इसे सुनेंगे बांगला में लेकिन मन में आयेंगे हिंदी बोल ।
यही तो है इस धुन का जादू---सुनिए
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