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Monday, October 22, 2007

फिल्‍मी रामलीलाएं दूसरा भाग ।



कल मैंने आपको विजयादशमी के अवसर पर फिल्‍म 'स्‍वदेस' की रामलीला सुनवाई थी ।
और वादा किया था कि आपको दो और फिल्‍मी रामलीलाएं सुनवाऊंगा । तो लीजिए हाजिर हूं । ये रामलीला फिल्‍म 'अक्‍स' से है । दरअसल ये बहुत ही शरारती और मॉडर्न किस्‍म की रामलीला है । जिसमें बच्‍चे हनुमान को ईमेल भी करते हैं । कुल मिलाकर रामलीला का एक अलग ही रूप है । शायद आपको सुनकर आनंद आएगा ।
तो ये रही फिल्‍म 'अक्‍स' की रामलीला । गुलज़ार के बोल । मुख्‍य स्‍वर अमिताभ बच्‍चन का है ।

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हट जाओ रावण मारूंगी बाण
राम के पास है तीर-कमान ।
रावण के पास है ज्ञान ही ज्ञान
रावण है तुझसे बड़ा विद्वान ।
लंका में जा जा के डंका बजैयो
अरे जा अपने घर में तू शेखी दिखैयो ।
जानती नहीं तू, जानता नहीं तू रावण का दबदबा
खोल के रख देगा दुनिया का डब्‍बा ।
चुटकी में तुझको मसल देंगे राम
एड़ी के नीचे कुचल देंगे राम ।
बोलती बहुत है तू राम की बच्‍ची
अरण दिखा ले जाऊंगा सच्‍ची ।
फिर देखेंगे जब आयेगा हनुमान ।
रावण ऐ रावण बोल ना ज्‍यादा
हस्‍ती है क्‍या तेरी पैदल तू प्‍यादा
पूंछ में आग लगाके तेरी सोने की लंका जला दूंगी
अरे गी नहीं गा । गा ।
ओके सोने की लंका जला दूंगा ।
सीता को बंदी बनाया है तूने
राम को जाके बता दूंगा ।
अरे सागर कैसे पार करेगा
पानी में गिरके डूब मरेगा
लंका भारत पाट दिया है
फोन का तार भी काट दिया है ।
हनुमान भैया ई मेल कर दो
राम को मेरे जल्‍दी खबर दो
लंका का डंका बजता रहेगा
जब तक राम है रावण रहेगा
राम के रूप हजारों हैं रावण
रघुपति राघव पतित पावन ।।





दूसरी रामलीला है फिल्‍म 'अब दिल्‍ली दूर नहीं' से । ये काफी गंभीर किस्‍म की रामलीला है । यहां फिल्‍म 'अक्‍स' जैसी शरारत नहीं है । आवाज़ें आशा भोसले और साथियों की ।
मुझे निजी रूप से ये रामलीला भी बहुत पसंद है ।

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हमरे मनोरथ पूरे करना रघुपति राघव राजाराम
तुम चाहो तो पल भर में बन जायें अपने बिगड़े काम ।
रघुवर के गुण गावें रे हम रघुवर के गुण गावे रे ।
बोलो सियापति रामचंद्र की जय
सोने के हिरण के पीछे गये क्‍यों राम अभी तक आए नहीं ।
नारी का मन कोमल ठहरा सीता जी घबराए गयीं ।
श्रीराम की खोज खबर लेने जब पड़ा लक्ष्‍मण को जाना
कुटिया के चारों ओर एक घेरा सा खींचा अनजाना ।
नत माथ कहा फिर सीता से तुम इसके बाहर मत जाना

रघुवर के गुण गावें हम रघुवर के गुण गावें रे ।

अलख निरंजन ।
रावण चतुर खिलाड़ी आया बनके भिखारी
बोला भिक्षा दे दे माई, सीता जी को दया आई
जो था घर में लेके आई, कहा आगे आओ साई
रावण बोला बाहर आओ, साधु से काहे शरमाओ
सीता बहकावे में आईं, घेरा छोड़ा बाहर आईं
रावण ने उनको उठाया, जबरन कंधे पे बिठाया
लेकर चला समंदर पार, सीता रोवे जार जार
रोवे जंगल और पहाड़, सुनके उनका हाहाकार

रघुवर के गुण गावें रे हम रघुवर के गुण गावें रे ।

जो कोई हरे पराई सीता, उसका होके रहे फजीता
रावण की लंका पे चढ़ाई, खूब हुई घमसान लड़ाई
इधर राम लक्ष्‍मण हनुमान, उधर खड़ा रावण शैतान
मूरख राक्षस तू जिद मत कर, अब भी कहना मान मेरा
तेरे हठ ने ओ हठधर्मी तेरे मौत का है सामान किया
मेरे एक बाण के छूटते ही निकलेंगे तेरे प्राण अभी
तेरे दसों शीश अभी इस धरती पे लुढ़ेकेंगे गेंद समान अभी ।

रघुवर के गुण गावें रे हम रघुवर के गुण गावें रे ।

क्‍यों मुझे डराओ रामचंद्र परवाह नहीं मुझे जान की
मेरी जान में जब तक जान है मेरी ही रहेगी जानकी
होशियार खबरदार ।

रघुवर के गुण गावे रे हम रघुवर के गुण गावे रे ।
बोलो सियापति रामचंद्र की जै ।


तो ये थी कुछ फिल्‍मी रामलीलाएं ।
दशहरे की शुभकामनाएं ।

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Sunday, October 21, 2007

आईये विजयादशमी पर कुछ फिल्‍मी रामलीलाएं सुनी जाएं ।


आज दशहरा है ।
मैं दो दिन पहले ही जबलपुर से लौटा हूं । जबलपुर का दशहरा बड़ा ही प्रसिद्ध है । दुर्गोत्‍सव की छटा जबलपुर में देखते ही बनती है । इस बार जबलपुर में घूम घूमकर दुर्गोत्‍सव देखा और पुराने दिनों को याद किया । सबसे अच्‍छा लगा सिद्धिबाला बोसा बांगला लाईब्रेरी के प्रांगण में जाकर दुर्गा प्रतिमा को देखने में । यही वो पंडाल है जहां मैंने बंगाल के कई लोकप्रिय कलाकारों के बाउल गीत सुने हैं । बंगाल की संस्‍कृति की अनमोल झांकी देखने मिलती है वहां । इसके अलावा गोविंदगंज रामलीला जो तकरीबन डेढ़ सौ सालों से जबलपुर का गौरव रही है, उसके मंच को देखकर भी अच्‍छा लगा ।


बहरहाल विजयादशमी प्रतीक है बुराई पर अच्‍छाई की जीत का । और जब जब मौक़ा आया है फिल्‍म-संसार ने रामलीला के प्रयोग किये हैं । तो आईये विजयादशमी के इस मौक़े पर तीन अलग-अलग फिल्‍मी रामलीलाएं सुनी जाएं । एक रामलीला आज सुनवाई जा रही है और बाकी दो का जिक्र होगा कल ।

पहली रामलीला फिल्‍म स्‍वदेस की है । जावेद अख्‍तर ने इसे लिखा है और संगीत ए आर रहमान का है ।
आवाज़ें मधुश्री, आशुतोष गोवारीकर और सा‍थियों की हैं । ये रामलीला का वाक़ई अद्भुत प्रयोग है । ये गीत मुझे बेहद पसंद है । ये गीत अपनी लेखनी, गायकी और संगीत तीनों के मामले में अनमोल है । इसीलिए मैं इसके शब्‍द भी दे रहा हूं ।
ताकि इसका पूरा आस्‍वादन किया जा सके । तो पढि़ए सुनिए और देखिए ये गीत ।

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पल पल है भारी वो विपदा है आई
मोहे बचाने अब आओ रघुराई ।।

आओ रघुबीरा ओ रघुपति राम आओ
मोरे मन के स्‍वामी मोरे श्रीराम आओ
राम राम जपती हूं सुनो मेरे राम आओ
राम राम जपती हूं सुनो मेरे राम जी
बजे सत्‍य का डंका, जले पाप की लंका
इसी क्षण तुम आओ मुक्‍त कराओ
सुन भी लो अब मेरी दुहाई ।। पल पल है भारी ।।

राम को भूलो ये देखो रावण आया है
फैली सारी सृष्टि पर जिसकी छाया है
क्‍यों जपती हो राम नाम तुम
क्‍यों लेती हो राम नाम तुम
राम नाम का रटन जो तुमने है लगाया
सीता..सीता तुमने राम में ऐसा क्‍या गुण पाया ।।

गिन पाये जो उनके गुण कोई क्‍या
इतने शब्‍द ही कहां हैं
पहुंचेगा उस शिखर पर कौन भला
मेरे राम जी जहां हैं
जग में सबसे उत्‍तम हैं
मर्यादा पुरूषोत्‍तम हैं
सबसे शक्तिशाली हैं
फिर भी रखते संयम हैं
पर उनके संयम की अब आने को है सीमा
रावण समय है मांग ले क्षमा ।

बजे सत्‍य का डंका, जले राम की लंका
आये राजा राम करे हम प्रणाम
संग आये लक्ष्‍मण जैसा भाई ।। पल पल है भारी ।।

राम में शक्ति अगर है, राम में साहस है तो
क्‍यों नहीं आये अभी तक वो तुम्‍हारी रक्षा को
जिनका वर्णन करने में थकती नहीं हो तुम यहां
ये बताओ वो तुम्‍हारे राम हैं इस वक्‍त कहां ।।

राम हिरदय में हैं मेरे राम ही धड़कन में हैं
राम मेरी आत्‍मा में राम ही जीवन में हैं
राम हर पल में हैं मेरे राम ही हर सांस में
राम आशा में मेरे राम ही हर आस में ।।
राम ही तो करूणा में हैं शांति में राम हैं
राम ही एकता में प्रगति में राम हैं
राम बस भक्‍तों नहीं शत्रु के भी चिंतन में हैं
देख तज के पाप रावण राम तेरे मन में हैं
राम तेरे मन में हैं राम मेरे मन में हैं ।
राम तो घर घर में हैं राम हर आंगन में हैं
मन से रावण जो निकाले राम उसके मन में हैं ।
मन से रावण जो निकाले राम उसके मन में हैं ।।

पल पल है भारी वो विपदा है आई
मोहे बचाने अब आओ रघुराई ।।
सुनो राम जी आए । मोरे राम जी आए
राजा रामचंद्र आये । श्रीराम चंद्र आए ।।




फिल्‍म संसार की दो और रामलीलाएं हैं । जिनका जिक्र कल किया जायेगा ।


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