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Tuesday, December 11, 2007

दिलीप कुमार की कुछ यादगार अदाएं वीडियो पर--जन्‍मदिन पर विशेष

दिलीप कुमार हमारे समय के सबसे समर्थ अभिनेता हैं । इतने सौम्‍य सुदर्शन और ठसकदार अभिनेता अब तो होते ही नहीं । क़द काठी, व्‍यक्तित्‍व और मुस्‍कान । सब कुछ दिलीप कुमार को इफरात में मिला है । मैंने भोपाल में अपने बचपन के दिनों में ना जाने कितने लोगों को दिलीप कुमार बनते देखा है । जिसकी भी क़द काठी दिलीप कुमार जैसी होती वो खुली कमांडर जीप में शानदार कपड़े पहनकर खुद को दिलीप कुमार कहते घूमता था । बी.आर.चोपड़ा ने भोपाल के पास मंडीदीप में 'नया दौर' की शूटिंग क्‍या की, भोपाल को गर्व करने का एक और बहाना मिल गया । आज भी उस शूटिंग से जुड़े किस्‍से आपको उस ज़माने के लोग सुनाते मिल जाएंगे ।

बहरहाल आज दिलीप साहब का जिक्र करने की वजह है । आज दिलीप साहब पूरे 85 साल के हो गये हैं । मैं तो ये सोच के फूला फूला घूमता हूं कि यूसुफ साहब और मेरा sun-sign एक ही है । sagittarius..........कहते हैं कि हिंदी फिल्‍म संसार में सबसे ओरीजनल अभिनेता थे दिलीप कुमार । बाद में कई स्‍टारों ने उनकी नकल करके अपना कैरियर संवार लिया ।

दिलीप साहब केवल कलाकार नहीं, बल्कि एक चलता फिरता एन्‍साईक्‍लोपीडिया हैं । दुनिया में किसी भी मुद्दे और किसी भी विषय पर आप उनसे बातें कर सकते हैं । अपने किरदार में उतरने के लिए वो जो मेहनत करते थे, वो किसी से भी छिपी नहीं है । कोहीनूर की शूटिंग के लिए सितार सीख सीख के उन्‍होंने अपनी उंगलियां जख्‍मी कर ली थीं जबकि केवल उनकी उंगलियों पर फोकस किया जाना था । देवदास और यहूदी जैसी फिल्‍मों में ट्रैजिक रोल करने के बाद जब उन्‍हें डिप्रेशन सा होने लगा तो डॉक्‍टरों ने सख्‍त हिदायत दी कि आप कॉमेडी करें । उसके बाद दिलीप साहब का एक नया रूप सामने आया । इस रूप पर भी दुनिया कुरबान हो गयी ।

दिलीप साहब का भाषाओं पर कमाल का नियंत्रण है । हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांगला....... ना जाने कितनी भाषाएं दिलीप साहब एकदम फर्राटे से बोलते हैं । आपको लता मंगेशकर के पहले विदेशी कंसर्ट में दिलीप साहब का भाषण तो याद होगा ही, जिसमें उन्‍होंने कहा था--'लता मंगेशकर की आवाज कुदरत की तखलीक का एक करिश्‍मा है ।' तो आईये आज दिलीप साहब को बोलते हुए देखें ।

क्‍या कोई कह सकता है कि सगीना मेहतो के बंगाली संस्‍करण में फर्राटे से बंगाली बोल रहा ये बांका जवान मूलत: पश्‍तो पठान है । फलों के व्‍यापारी का बेटा ।



नया दौर फिल्‍म में दिलीप कुमार एक तांगे वाले बने थे । उनकी अदाएं अब रंगीन परदे पर । नया दौर का एक रंगीन ट्रेलर ।



यहां दिलीप कुमार जोश मलीहाबादी की एक नज्‍म पढ़ रहे हैं किसी मुशायरे में । अदा तो देखिए । मेरी तमन्‍ना है कि किसी दिन इस नज्‍म को कठिन शब्‍दों के अर्थ और इबारत समेत रेडियोवाणी पर पेश करूं ।



दिलीप साहब का ये अंदाज देखिए, फिल्‍म संघर्ष का ये मशहूर गीत और दिलीप साहब का थिरकना




यहां अमिताभ बच्‍चन का दिलीप कुमार से सामना हुआ है फिल्‍म शक्ति में । कहते हैं कि बच्‍चन साहब के लिए ये फिल्‍म अपने हाथ जला लेने जैसी बन गयी थी ।




दिलीप साहब को जन्‍मदिन मुबारक ।

सारे वीडियो यूट्यूब से साभार हैं । अगर आपका कनेक्शन सुस्‍त है तो आपको इन वीडियोज़ को देखने में दिक्‍कत हो सकती है ।

चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: दिलीप-कुमार, dilip-kumar, yusuf, khan,

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