अधरं मधुरं वदनं मधुरं: मधुराष्टकम: पंडित जसराज की आवाज़ में
संगीत खोजने की यायावरी में बड़ा आनंद है । इंटरनेट पर खोजें या स्वयं घुमक्कड़ी करके । अकसर ही ये होता है कि आप खोजने कुछ चलते हैं और हाथ कुछ और लग जाता है । ज़ाहिर है कि जो खोजने चले थे वो धरा-का-धरा रह जाता है और आप इस नये 'हासिल' की ख़ुशी में फूले नहीं समा रहे होते हैं । इस बार भी यही हुआ है । हम कुछ और खोज रहे थे पर कई आवाज़ों में 'मधुराष्टकम 'मिल गया । 'मधुराष्टकम' की रचना श्री वल्लभाचार्य ने की थी । पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी में वल्लभाचार्य ने कृष्ण-भक्ति से परिपूर्ण अपनी रचनाएं
लिखीं । 'मधुराष्टकम' उन्हीं में से एक है ।



