संगीत का कोई मज़हब, कोई ज़बान नहीं होती। 'रेडियोवाणी' ब्लॉग है लोकप्रियता से इतर कुछ अनमोल, बेमिसाल रचनाओं पर बातें करने का। बीते नौ बरस से जारी है 'रेडियोवाणी' का सफर।
Showing posts with label पंडित जसराज. Show all posts
Showing posts with label पंडित जसराज. Show all posts

Sunday, August 16, 2009

अधरं मधुरं वदनं मधुरं: मधुराष्‍टकम: पंडित जसराज की आवाज़ में

संगीत खोजने की यायावरी में बड़ा आनंद है । इंटरनेट पर खोजें या स्‍वयं घुमक्‍कड़ी करके । अकसर ही ये होता है कि आप खोजने कुछ चलते हैं और हाथ कुछ और लग जाता है । ज़ाहिर है कि जो खोजने चले थे वो धरा-का-धरा रह जाता है और आप इस नये 'हासिल' की ख़ुशी में फूले नहीं समा रहे होते हैं । इस बार भी यही हुआ है । हम कुछ और खोज रहे थे पर कई आवाज़ों में 'मधुराष्‍टकम 'मिल गया । 'मधुराष्‍टकम' की रचना श्री वल्‍लभाचार्य ने की थी । पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी में वल्‍लभाचार्य ने कृष्‍ण-भक्ति से परिपूर्ण अपनी रचनाएं
लिखीं । 'मधुराष्‍टकम' उन्‍हीं में से एक है ।

READ MORE...
Blog Widget by LinkWithin
.

  © Blogger templates Psi by Ourblogtemplates.com 2008 यूनुस ख़ान द्वारा संशोधित और परिवर्तित

Back to TOP