Friday, October 2, 2009

सभी सुख दूर से गुज़रें : आरंभ फिल्‍म का गीत । मुकेश की आवाज़ । हरीश भादानी को विनम्र श्रद्धांजली

रेडियोवाणी पर मन्‍ना दा के बारे में अपनी नई पोस्‍ट की तैयारी कर ही रहा था कि तभी जयपुर से भाई प्रेमचंद गांधी का मेल आया । हरीश भादानी नहीं रहे ।  हरीश जी को मैं ज्‍यादा नहीं जानता । उनकी कुछ रचनाएं ज़रूर पढ़ी हैं । प्रेम भाई ने उनके फिल्‍म 'आरंभ' के गीत के बारे में भी बताया जो फ़ौरन ही उपलब्‍ध हो गया ।

हरीश जी के बारे में प्रेमचंद गांधी ने
यहां विस्‍तार से लिखा है । इसके अलावा किशोर चौधरी की इस पोस्‍ट को भी पढ़ा जाना ज़रूरी है ।

फिल्‍म 'आरंभ' सन 1976 में आई थी । संगीतकार थे आनंद शंकर । इस गाने को मुकेश ने गाया है । सुनिए ।

ये इस गीत का लगभग ढाई मिनिट वाला संस्‍करण है । यानी इसके कुछ अंतरे गीत में नहीं हैं, पर अपने लालित्‍य में ये सचमुच अनमोल है ।



सभी सुख दूर से गुज़रें गुज़रते ही चले जाएं
मगर पीड़ा उमर भर साथ चलने को उतारू है
सभी दुख दूर से गुज़रे ...
हमारा धूप में घर छाँव की क्या बात जानें हम
अभी तक तो अकेले ही चले क्या साथ जानें हम
बता दें क्या घुटन की घाटियाँ कैसी लगीं हमको
सदा नंगा रहा आकाश क्या बरसात जानें हम
बहारें दूर से गुज़रें गुज़रती ही चली जाएं
मगर पतझड़ उमर भर साथ चलने को उतारू है
सभी दुख दूर से गुज़रे ...
अटारी को धरा से किस तरह आवाज़ दे दें हम
मेंहदिया पाँव को क्यों दूर का अन्दाज़ दे दें हम
चले शमशान की देहरी वही है साथ की संज्ञा
बरफ़ के एक बुत को आस्था की आँच क्यों दें हम
हमें अपने सभी बिसरें बिसरते ही चले जाएं
मगर सुधियाँ उमर भर साथ चलने को उतारू है
सभी दुख दूर से गुज़रे ...
सुखों की आँख से तो बांचना आता नहीं हमको
सुखों की साख से तो आँकना आता नहीं हमको
चलें चलते रहें उमर भर हम पीर की राहें
सुखों की लाज से ढांपना आता नहीं हमको
निहोरे दूर से गुज़रें गुज़रते ही चले जाएं
मगर अनबन उमर भर साथ चलने को उतारू है
सभी दुख दूर से गुज़रे ...

रेडियोवाणी पर हम हरीश भादानी को विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करते हैं ।

अब sms के ज़रिए पाईये ताज़ा पोस्‍ट की जानकारी

9 comments:

Gopal Singh October 2, 2009 9:14 PM  

हरीश जी का लिखा ये गीत आपने सुना के उनको सची श्रधांजलि दी है आपने. आज वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी कविताओ और गीतों से जरिये वो हमेशा हमारे दिलो में गुनगुनाते रहेंगे. अपनी खुद की आवाज़ में....

धन्यवाद् युनुस जी

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन October 3, 2009 12:09 AM  

सुन्दर गीत, धन्यवाद!
हरीश जी को श्रद्धांजलि!

दिलीप कवठेकर October 3, 2009 12:10 AM  

हरीश जी के गीत को सुनवाने के लिये धन्यवाद.

सुरीली श्रद्धांजली...

मन का पाखी October 3, 2009 2:57 PM  

हरीश जी को हमारे श्रधा सुमन ....ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे
शुक्रिया इतने ख़ूबसूरत गीत के लिए.

Kishore Choudhary October 3, 2009 4:32 PM  

युनुस भाई, थेंक यू !! आपके लगाए गीत से खुशबू भी बिखर उठी है !

Neeraj October 31, 2009 3:20 PM  

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Hitendra Singh November 13, 2009 10:22 AM  

Dear Yunus Bhai,

I have been listening Vividh Bharti for a long time and I really like your voice very much. You've got a great voice!

पंकज November 22, 2009 10:33 PM  

भाव पूर्ण श्रद्धांजली

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रेडियोवाणी की कुछ पुरानी पोस्टों पर गीत बज नहीं रहे हैं । इसकी वजह है उनकी 'होस्ट-साइट' का बंद हो जाना । कोशिश यही है कि जल्दी ही इन गीतों को फिर अपलोड करके आपको सुनवाया जाए । ले आउट बदलने की वजह से कुछ पुरानी पोस्‍टों की सामग्री अस्‍त-व्‍यस्‍त नज़र आ सकती है । इसे भी धीरे-धीरे सही करने का प्रयास है

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